धनतेरस के शुभ अवसर पर धर्मप्रसार के कार्य हेतु ‘सत्पात्र-दान’ कर श्री लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें !
सभी पाठकों, शुभचिंतकों तथा धर्मप्रेमियों से नम्र निवेदन !
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‘दीपावली केवल हिन्दुओं का उत्सव नहीं है, अपितु वह सभी उत्सवों का शिरोमणि है । संतों के जीवन में दीपावली का आनंद नित्य होता है । ‘संतों को अपेक्षित दीपावली क्या होती है ?’ यहां इसका विवेचन किया गया है ।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल का आवाहन –
दीवाली के प्रकाशमय क्षणों को साझा करने के लिए ‘#MPCBDiyaChallenge’ हैशटैग प्रारम्भ ।
इस आदेश के अनुसार, १८ से २१ अक्टूबर तक केवल दिल्ली-एन.सी.आर. में ही पटाखे फोडने की अनुमति होगी । साथ ही, २० अक्टूबर को दिवाली के दिन प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक और रात्रि ८ बजे से १० बजे तक हरित पर्यावरण पूरक पटाखे फोडने की अनुमति होगी ।
प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है; लेकिन यह मुद्दा केवल हिन्दू त्योहारों के समय ही क्यों उठाया जाता है ?
दीपावली प्रकाश का त्योहार है । ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’, अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले जानेवाला त्योहार है; इसलिए उसे ‘ज्योतिपर्व’ भी कहते हैं ।
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को ‘नरक चतुर्दशी’ कहते हैं । नरकासुर नामक अधम तथा क्रूर राक्षस के अंतःपुर में १६ सहस्र स्त्रियां बंदीवास में थीं । पृथ्वीलोक के सभी राजा उसके अत्याचार से त्रस्त थे । तब श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करने का निश्चय किया । उसके शिरच्छेद का दायित्व सत्यभामा ने लिया ।
दूसरे व्यक्ति की पीठ पर उबटन लगाते समय पीठ की रीढ की रेखा के पास, दोनों हाथों की उंगलियों का अग्रभाग आए इस प्रकार रखकर ऊपर से नीचे की दिशा में दोनों हाथ एक साथ घुमाएं ।
सामान्यतः अमावस्या अशुभ मानी जाती है; परंतु दिवाली की अवधि में अमावस्या भी शरद पूर्णिमा अर्थात कोजागरी पूर्णिमा समान ही कल्याणकारी और समृद्धिदर्शक होती है । इस दिन श्री लक्ष्मीपूजन और अलक्ष्मी नि:सारण इत्यादि धार्मिक विधियां की जाती हैं ।