
अ. पीठ : दूसरे व्यक्ति की पीठ पर उबटन लगाते समय पीठ की रीढ की रेखा के पास, दोनों हाथों की उंगलियों का अग्रभाग आए इस प्रकार रखकर ऊपर से नीचे की दिशा में दोनों हाथ एक साथ घुमाएं ।
आ. कमर : दूसरे व्यक्ति को लगाते समय कमर की आडी रेखा से पीठ की ओर उसके बाईं ओर से दाईं ओर आकर पुन: बाईं ओर से दाईं ओर जाएं । ऐसे बार-बार लगाएं ।
– एक विद्वान (श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ‘एक विद्वान’ इस नाम से लेखन करती हैं ।) (३.१०.२००६)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !