
‘स्वयं को और पुरोहित को मंगल तिलक लगाएं ।
१. कलश से पानी बर्तन में लेकर, उससे फिर पानी आचमनी से दाईं हथेली पर लेकर आचमन करें ।
२. प्राणायाम
३. प्रार्थना
४. आसनशुद्धि
५. कलशपूजन
६. शंखपूजा
७. घंटापूजा
८. मंडपपूजा
९. पूजासामग्री प्रोक्षण
१०. कलशप्रार्थना
११. देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती की पूजा
११ अ. श्री लक्ष्मी ध्यान
११ आ. श्री सरस्वती ध्यान
१२. गंध, अक्षता, पुष्प चढाएं ।
१३. नैवेद्य दिखाकर आरती करें ।’
(साभार : मासिक ‘भाग्यनिर्णय’)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?