
‘स्वयं को और पुरोहित को मंगल तिलक लगाएं ।
१. कलश से पानी बर्तन में लेकर, उससे फिर पानी आचमनी से दाईं हथेली पर लेकर आचमन करें ।
२. प्राणायाम
३. प्रार्थना
४. आसनशुद्धि
५. कलशपूजन
६. शंखपूजा
७. घंटापूजा
८. मंडपपूजा
९. पूजासामग्री प्रोक्षण
१०. कलशप्रार्थना
११. देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती की पूजा
११ अ. श्री लक्ष्मी ध्यान
११ आ. श्री सरस्वती ध्यान
१२. गंध, अक्षता, पुष्प चढाएं ।
१३. नैवेद्य दिखाकर आरती करें ।’
(साभार : मासिक ‘भाग्यनिर्णय’)
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