सर्वोच्च न्यायालय से लेकर कनिष्ट न्यायालयों तक कुल ५ करोड प्रकरण लंबित हैं !
गत अनेक दशकों में सर्वदलीय सरकारें तथा और गईं ! यदि कोई देशभक्त यह सोचता है कि इस भीषण समस्या का स्थायी समाधान निकाले बिना प्रत्येक संसदीय सत्र में लंबित प्रकरणों की केवल बढती संख्या सूचित करने क्या उपयोग ? तो उसमें उसकी क्या त्रुटि ?