भारत का शत्रु : भ्रष्टाचार
पानी में रहनेवाली मछली पानी कब पीती है, यह हम नहीं समझ सकते, उसी प्रकार सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार कब करते हैं, इसे हम नहीं पहचान सकते’, ऐसा आर्य चाणक्य ने भ्रष्टाचार के विषय में लिख रखा है ।
पानी में रहनेवाली मछली पानी कब पीती है, यह हम नहीं समझ सकते, उसी प्रकार सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार कब करते हैं, इसे हम नहीं पहचान सकते’, ऐसा आर्य चाणक्य ने भ्रष्टाचार के विषय में लिख रखा है ।
इस प्रकरण में ३ आरोपियों को बंदी बनाया गया है । जिसमें फरीदाबाद (हरियाणा) के धर्मगुरू रामचंद्र भारती, भाग्यनगर के व्यापारी नंद कुमार और तिरुपति के सिम्हयाजी स्वामी का समावेश है । इसके साथ केरल में कोच्ची के डॉ.जग्गू के घर की तलाशी ली गई ।
जो जनता को प्रतिदिन अनेक वर्षों से दिख रहा है, वही आज उच्चतम न्यायालय कह रहा है । यह स्थिति सभी पार्टी के शासनकर्ताओं को भी ज्ञात है, तब भी यह स्थिति बदलने के लिए कोई भी ठोस और कठोर प्रयास नहीं करते, यह भारतीयों के लिए लज्जास्पद है !
‘केजरीवाल अराजकता के प्रतीक हैं । स्वयं की सरकार द्वारा किए भ्रष्टाचार के सूत्रों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ही उन्होंने मुद्रा नोटों पर देवताओं के चित्र छपवाने की मांग की है ।
कांग्रेस की ‘राजकीय’ अनुज्ञप्ति भी रद्द करने के लिए अब जनता को आवाज उठानी चाहिए !
भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्री की तुलना महान क्रांतिकारी से करनेवाले ‘आप’ के मुख्यमंत्री का बौद्धिक दिवालियापन !
आयकर विभाग ने ७ सितंबर को देश के १०० स्थानों पर छापेमारी की । ये छापे मद्य घोटाला, दोपहर का भोजन, राजनीतिक निधि तथा कर चोरी से संबंधित हैं ।
अवैध भवनों का निर्माणकार्य करने हेतु भ्रष्ट सरकारी अधिकारी, शासनकर्ता सहायता करते हैं तथा जनता को उनके विरुद्ध वैध मार्ग से लडाई करनी पडती है, तब जाकर ऐसी कार्यवाही होती है ! मूलत: प्रामाणिक अधिकारी तथा शासनकर्ता होने हेतु धर्माचरणी लोगों का ‘हिन्दू राष्ट्र’ अनिवार्य है !
बंदी बनाए गए अधिकारियों की संख्या इतनी होगी, तो जिन्हें अब तक बंदी नहीं बनाया गया है, उनकी संख्या कितनी होगी, इसका विचार ही न करें तो अच्छा ! प्रशासन भ्रष्टाचारियों की भरमार का द्योतक है !
एक अधिकारी के यहां इतनी संपत्ति मिलती है, तो अन्य अधिकारियों के पास कितनी संपत्ति होगी और देश के सभी सरकारी अधिकारियों की जांच की, तो कितनी बेहिसाब संपत्ति मिलेगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती !