अफगानिस्तान के आंतरिक प्रश्नों पर बात न करें पाकिस्तान ! – अफगानिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई

अफगानिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अफगानिस्तान के आंतरिक प्रश्नों में हस्तक्षेप न करने एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अफगानिस्तान के प्रतिनिधि के रूप में बोलना बंद करने की चेतावनी दी है ।

अफगानिस्तान के विषय पर भारत की ओर से आज ७ देशों की बैठक का आयोजन !

बैठक में, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता न देनेवाले देश अंतर्भूत !
चीन और पाकिस्तान ने बैठक में सम्मिलित होना किया अस्वीकार !

काबुल (अफगानिस्तान) में हुए बम विस्फोट में तालिबान के कमांडर हमदुल्लाह मुखलिस सहित २५ लोगों की मृत्यु

जहां धर्मांध बहुसंख्यक होते हैं, वहां वे एक दूसरे को जान से मारते हैं !

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से अमेरिकी डॉलर पर प्रतिबंध

नागरिकों को आर्थिक कामकाज करने के लिए अफगानी मुद्रा का ही प्रयोग करने की सख्ती की गई है ।

इस्लाम स्वीकार करो या अफगानिस्तान छोडो़ ! – तालिबान द्वारा सिखों को धमकियां

खालिस्तानवादी इस विषय में क्यों नहीं बोलते  कि उन्हें पाक और अफगानिस्तान में सिखों पर किए जाने वाले अत्याचार स्वीकार हैं ?

तालिबान की सरकार और वैश्विक घटनाक्रम !

पाकिस्तान और चीन ने तालिबान को युद्ध हेतु सहायता की थी । इसीलिए तालिबान ने पाकिस्तान और चीन को शपथविधि समारोह का निमंत्रण भेजा । अर्थात तालिबान द्वारा उन्हें निमंत्रित करना स्वाभाविक ही था ।

पहले आपने जो आश्वासन दिए हैं, उन्हें पूर्ण कीजिए ! – संयुक्त राष्ट्रों ने तालिबान सरकार की सुनाई खरी-खरी !

तालिबानी सरकार के शिष्टमंडल ने पहली बार अमेरिका सरकार के साथ की गई चर्चा करने के उपरांत गुटरेस ने उसपर संयुक्त राष्ट्रों की यह भूमिका रखी है ।

कोई हमारी सरकार को कमजोर करने का प्रयत्न न करे ! – संयुक्त राज्य अमेरिका को तालिबान की अप्रत्यक्ष चेतावनी !

तालिबान जैसे नगण्य आतंकी, शक्तिशाली अमेरिका को चेतावनी देते हैं और अमेरिका चुप रहता है! यह तथ्य भारत और भारतीय सेना के शौर्य एवं महत्व को उजागर  करता  है !

(कहते हैं) ‘मोहम्मद गजनी १०वीं शताब्दी का प्रसिद्ध मुसलमान योद्धा था, जिसने सोमनाथ की मूर्ति तोडी थी !’

इससे तालिबानी सरकार भारत और हिन्दूद्वेषी है, यही स्पष्ट होता है ! भारत को ऐसे सरकार के साथ किसी भी प्रकार के संबंध न रखकर उसका बहिष्कार ही करना चाहिए !’

काबुल (अफगानिस्तान) में स्थित गुरुद्वारा में तालिबानियों द्वारा तोडफोड

कुछ लोगों को नियंत्रण में लेकर अपने साथ ले जाया गया !
पाकिस्तान के बल पर छलांग लगानेवाले खलिस्तानी इस विषय में चुप क्यों हैं ?