धर्मांध दंगाइयों की याचिका एवं देहली उच्च न्यायालय की भूमिका !
पहले दंगे में सम्मिलित होना, तत्पश्चात मूलभूत अधिकार का हनन हो रहा है कहना, यह उचित नहीं । ऐसा कहते हुए न्यायालय ने धर्मांध की देहली पुलिस के विरुद्ध की याचिका अस्वीकार की ।
पहले दंगे में सम्मिलित होना, तत्पश्चात मूलभूत अधिकार का हनन हो रहा है कहना, यह उचित नहीं । ऐसा कहते हुए न्यायालय ने धर्मांध की देहली पुलिस के विरुद्ध की याचिका अस्वीकार की ।
कावड यात्रा पर बार-बार होने वाले आक्रमण रोक न पाना पुलिस-प्रशासन के लिए लज्जास्पद ! ऐसे आक्रमण रोकने के लिए अब हिन्दुओं को संगठित होना चाहिए !
सुरतकल भाग में ४-५ अज्ञात हमलावरों ने २८ जुलाई को रात्रि लगभग ८ बजे महंमद फाजील की अमानुषिक पिटाई की एवं चाकू से वार कर हत्या कर दी ।
‘आतंकवाद का न कोई धर्म है और न ही रंग’, ऐसा शोर मचानेवाले जिहादियों के समर्थकों को अब क्या कहना है ?
ध्यान दें कि भिखारी जैसे धर्मांध के पास खाने के लिए कुछ नहीं था, किंतु एक हथियार था, ऐसे आक्रमणों से स्वयं की रक्षा करने के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण लें !
मूलत: हिन्दू और उनके नेताओं की हत्या न हो, इसके लिए सरकार क्या करने वाली है, इसका उत्तर मुख्यमंत्री को देना चाहिए, ऐसा हिन्दुओं को लगता है !
उत्तर प्रदेश पुलिस से ऐसे लोगों पर कडी से कडी कार्रवाई करना अपेक्षित है !
‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ एवं ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’ के नाम अनेक देशविरोधी कार्यवाहियों में अब तक सामने आने पर भी उन पर अब तक प्रतिबंध न लगाया जाना, यह हिन्दुओं के लिए आश्चर्य की बात है !
झारखंड और बिहार ये राज्य भारत में है कि पाकिस्तान में ? अब ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हिन्दुओं को भी धार्मिक दिनों के अनुसार अवकाश देने की मांग करनी चाहिए !
तालिबानी राज्य में सिख असुरक्षित ! इस विषय में खालिस्तानवादी मुंह क्यों नहीं खोलते ?