
१. तिथि : चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
२. पूजन : इस दिन होली की राख अथवा धुलि की पूजा का विधान है । पूजा हो जाने पर आगे दिए मंत्र से उसकी प्रार्थना करते हैं ।
वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शङ्करेण च । अतस्त्वं पाहि नो देवि भूते भूतिप्रदा भव ॥
अर्थ : हे लक्ष्मी, तुम इंद्र, ब्रह्मा एवं महेश द्वारा वंदित हो, इसलिए हे ऐश्वर्यवती देवी, तुम हमें ऐश्वर्य देनेवाली बनो एवं हमारी रक्षा करो ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?