
१. तिथि : चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
२. पूजन : इस दिन होली की राख अथवा धुलि की पूजा का विधान है । पूजा हो जाने पर आगे दिए मंत्र से उसकी प्रार्थना करते हैं ।
वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शङ्करेण च । अतस्त्वं पाहि नो देवि भूते भूतिप्रदा भव ॥
अर्थ : हे लक्ष्मी, तुम इंद्र, ब्रह्मा एवं महेश द्वारा वंदित हो, इसलिए हे ऐश्वर्यवती देवी, तुम हमें ऐश्वर्य देनेवाली बनो एवं हमारी रक्षा करो ।
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