पानीपत में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन

पानीपत (हरियाणा) के हुडा सेक्टर ६ के शिव मंदिर समीप के पार्क में शिव मंदिर जनसेवा समिति ट्रस्ट और हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया था । सम्मेलन में १५० से अधिक धर्मप्रेमी उपस्थित थे ।

नवजात शिशु का नाम धर्मशास्त्र के अनुसार रखें !

‘हिन्दू धर्म में बताए गए प्रमुख १६ संस्कारों में से ‘नामकरण’ ५ वां संस्कार है । नवजात शिशु के जन्म के १२ वें अथवा १३ वें दिन उसका नामकरण संस्कार किया जाता है ।

धर्मशिक्षा एवं आचरण के कारण हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की रक्षा हो ! – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

दीपावली के एक-एक दिन का महत्त्व हमने आनेवाली युवा पीढी को नहीं बताया, तो हिन्दू धर्म की रक्षा कैसे होगी ? अतः हमें त्योहारों एवं सोलह संस्कारों की वैज्ञानिकता एवं महत्त्व आनेवाली युवा पीढीतक पहुंचाना होगा । धर्मशिक्षा एवं आचरण के कारण हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की रक्षा होगी ।

गीता में बताए ज्ञान को जीवन में उतारना आवश्यक ! – सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी

‘‘कुछ लोग श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय पढते हैं; परंतु जीवन की प्रतिकूल परिस्थिति में वे गीता के ज्ञान के आधार पर लड नहीं सकते । इसलिए गीता में बताए ज्ञान को प्रत्यक्ष जीवन में उतारना आवश्यक है ।

दिल्ली में नूतन मराठी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में तनावमुक्ति पर सनातन संस्था द्वारा प्रवचन का आयोजन !

दिल्ली के नूतन मराठी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षिकाओं के लिए तनाव मुक्ति के विषय में प्रवचन का आयोजन किया गया ।

संस्था द्वारा ग्रंथ-प्रदर्शनी और धर्म की शिक्षा देनेवाले फ्लेक्स की प्रदर्शनी

फरीदाबाद के कन्वेंशन सेंटर, सेक्टर-१२ में जिला स्तरीय गीता महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें सनातन संस्था द्वारा ग्रंथ, सात्त्विक उत्पाद और धर्मशिक्षा देनेवाले फ्लेक्स की प्रदर्शनी लगाई गई ।

आचार ही धर्म की नींव है !

‘सनातन हिन्दू संस्कृति में आचार को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है । ‘प्रत्येक को श्रुति-स्मृतियों द्वारा प्रतिपादित आचारधर्म का पालन करना चाहिए’, इस पर धर्मशास्त्र बल देता है ।’

स्नान पूर्व करने योग्य प्रार्थना एवं स्नान करते समय उपयुक्त श्लोकपाठ

‘हे जलदेवता, आपके पवित्र जल से मेरे स्थूलदेह के सर्व ओर निर्माण हुआ रज-तम का कष्टदायक शक्ति का आवरण नष्ट होने दें । बाह्यशुद्धि के समान ही मेरा अन्तर्मन भी स्वच्छ एवं निर्मल बनने दें ।’

तिलक धारण करने के संदर्भ में आचार

स्नान के उपरान्त अपने-अपने सम्प्रदाय के अनुसार मस्तक पर तिलक अथवा मुद्रा लगाएं, उदा. वैष्णवपंथी मस्तक पर खडा तिलक, जबकि शैवपंथी आडी रेखाएं अर्थात ‘त्रिपुण्ड्र’ लगाते हैं ।