अगले ६ महीने युद्ध का महासंकट – प्रसिद्ध ज्योतिषी सिद्धेश्वर मारटकर
‘सनातन प्रभात’ने विगत अनेक वर्षाें से आनेवाले महाविनाशकारी आपातकाल के विषय में ‘जनता को आपातकाल की तैयारी कैसे करनी चाहिए ?’, इस विषय में लेखमालाएं प्रकाशित की हैं ।
‘सनातन प्रभात’ने विगत अनेक वर्षाें से आनेवाले महाविनाशकारी आपातकाल के विषय में ‘जनता को आपातकाल की तैयारी कैसे करनी चाहिए ?’, इस विषय में लेखमालाएं प्रकाशित की हैं ।
आपातकाल में अन्न, पानी, औषधि, ईंधन आदि समय पर उपलब्ध होना कठिन होता है । आपातकाल में परिवार के लिए आवश्यक नित्योपयोगी तथा प्रासंगिक वस्तुओं का अभाव होता है । आपातकाल की दृष्टि से उपयुक्त वस्तुएं खरीदना सरल हो, इस हेतु यहां विभिन्न वस्तुओं की सूची दी है ।
आगामी आपत्काल में आधुनिक वैद्य अथवा उनकी दवाएं उपलब्ध नहीं होंगी । उस समय यह ज्ञात करना कठिन होगा कि किस विकार के लिए क्या उपाय कर सकते हैं । अतः साधक यह लेख संग्रह करके रखें तथा उसी के अनुसार नामजप करें । इससे विकार अल्प होने में लाभ होगा ।
आपकी दृष्टि सुंदर होनी चाहिए । तब मार्ग पर स्थित पत्थरों, मिट्टी, पत्तों और फूलों में भी आपको भगवान दिखाई देंगे; क्योंकि प्रत्येक बात के निर्माता भगवान ही हैं । भगवान द्वारा निर्मित आनंद शाश्वत होता है; परंतु मानव-निर्मित प्रत्येक बात क्षणिक आनंद देनेवाली होती है । क्षणिक आनंद का नाम ‘सुख’ है ।
हमें अपने रसोईघर को ‘अन्नपूर्णा कक्ष’ बना देना चाहिए । रसोईघर में अन्न का अभाव पड सकता है । अन्नपूर्णा कक्ष में संपूर्ण ब्रह्मांड का पोषण करनेवाली माता अन्नपूर्णा विराजमान होती है । उसके कारण वहां कभी भी किसी बात का अभाव नहीं होता ।
आपातकाल में रक्षा होने हेतु व्यक्ति स्वयं के बलबूते पर चाहे कितनी भी तैयारी कर ले, तब भी भूकंप, सुनामी जैसी महाभीषण आपदाओं से बचने हेतु संपूर्ण भार भगवान पर ही सौंपना पडता है । व्यक्ति ने साधना कर भगवान की कृपा पाई, तो वे किसी भी संकट में उसकी रक्षा करते ही हैं ।
भविष्यवेत्ता केवल भविष्यवाणी करते हैं, तो गुरु कृपावत्सल होते हैं । उसके कारण ही द्रष्टा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने आपातकाल की आहट पहचानकर साधकों को उस विषय में केवल सूचित ही नहीं किया, अपितु आनेवाले समय में साधकों को सुविधाजनक हो; इसके लिए प्रत्यक्ष उपाय भी आरंभ किए ।
एक बार दैनिक ‘सनातन प्रभात’ में छपा चीन से संबंधित एक समाचार देखकर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी कहने लगे, ‘‘आनेवाले कुछ वर्षाें में आपकी पीढी को तीसरा विश्वयुद्ध देखने के लिए मिलेगा । चीन पहले युद्ध की घोषणा करेगा और उसके उपरांत तीसरा विश्वयुद्ध आरंभ होगा ।’’
हवाईमार्ग, रेल्वेमार्ग, महामार्ग आदि वाहन-व्यवस्था चरमरा जाने के कारण शासन द्वारा भी सहायता करने में अडचनें आना और जीवनावश्यक वस्तुओं के लिए जानलेवा संघर्ष करना पडना
धर्म अधर्म युद्ध में जो ईश्वर की भक्ति करता है, धर्म के पक्ष में खडा रहता है, ईश्वर उसकी रक्षा करते हैं; परंतु उसके लिए हमें भक्त बनना आवश्यक है ।