
तीसरा विश्वयुद्ध अतिभीषण होने के कारण शारीरिक और मानसिक समाधान योजना के साथ ही आध्यात्मिक उपचार भी करने पडते हैं । इसका अर्थ है हमें अपनी साधना के प्रयास बढाने होंगे । धर्म अधर्म युद्ध में जो ईश्वर की भक्ति करता है, धर्म के पक्ष में खडा रहता है, ईश्वर उसकी रक्षा करते हैं; परंतु उसके लिए हमें भक्त बनना आवश्यक है । आपातकाल आगे गया है । उसका लाभ उठाकर अधिकाधिक भक्ति का, साधना का, धर्माचरण करने का प्रयास बढाया तो ईश्वर भक्तों की रक्षा करेंगे ही, इसमें कोई शंका नहीं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के विद्यालय में ‘लव जिहाद’ विषय पर व्याख्यान