
१. युद्ध संकट के कारण घरों का गिरना, परिवारों का बिखरना और खानेपीने की समस्या निर्माण होना
२. ईंधन (पेट्रोल, डिजल आदि) की समस्या उत्पन्न होने के कारण यातायात ठप्प होना
३. उद्योग-धंधे बंद होने के कारण प्रचंड आर्थिक मंदी आना
४. साथ ही रोग फैलना तथा डॉक्टर, वैद्य, औषधि, रुग्णालय आदि सहजता से उपलब्ध न होना
५. दूरभाष, चल-दूरभाष, इंटरनेट, तथा विद्युत पर चलनेवाले सभी यंत्र और व्यवस्था खंडित होना
६. हवाईमार्ग, रेल्वेमार्ग, महामार्ग आदि वाहन-व्यवस्था चरमरा जाने के कारण शासन द्वारा भी सहायता करने में अडचनें आना और जीवनावश्यक वस्तुओं के लिए जानलेवा संघर्ष करना पडना
७. आपातकाल की इस भीषणता के कारण अनेक लोगों का मानसिक रोगी होना और कुछ लोगों को लगना कि `इस प्रकार जीने से अच्छा तो मर जाना है’ ।
(भीषण आपातकाल का सामना करने के लिए सभी शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक, आध्यात्मिक इत्यादि स्तरों पर पूर्वनियोजन कैसे करें ? इस विषय पर सविस्तार विवेचन सनातन की `आपातकाल में जीवनरक्षा ग्रंथमाला (२ खंड)’ में किया है ।)
Temple Bonds : केन्द्र सरकार ‘टेम्पल बॉन्ड्स’ योजना लाने की तैयारी में !
Trump Tariff : ट्रम्प भारत सहित अनेक देशों पर १२.५ प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाएंगे
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी