
१. एक बार दैनिक ‘सनातन प्रभात’ में छपा चीन से संबंधित एक समाचार देखकर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी कहने लगे, ‘‘आनेवाले कुछ वर्षाें में आपकी पीढी को तीसरा विश्वयुद्ध देखने के लिए मिलेगा । चीन पहले युद्ध की घोषणा करेगा और उसके उपरांत तीसरा विश्वयुद्ध आरंभ होगा ।’’
२. हमने नागपुर स्थित हमारा घर बेचा, तब परात्पर गुरु डॉक्टरजी कहने लगे, ‘‘घर बेचकर मिले पैसों को संग्रहित कर रखिए । आगे जब आपातकाल आएगा, तब साधकों के लिए प्रतिदिन पाव खरीदने के लिए भी बहुत पैसे लगेंगे ।’’
३. वर्ष १९९८ में एक साधक ने ‘बेकरी’ से संबंधित कोर्स किया है, ऐसा परात्पर गुरु डॉक्टरजी को ज्ञात हुआ । तब उन्होंने बताया, ‘‘आनेवाले समय में आपातकाल आनेवाला है, तब साधकों को तुम्हारी ‘बेकरी’ से ब्रेड मिल सकेंगे ।’’
४. सांगली के एक साधक अपने परिवार सहित आश्रम में रहने के लिए आए, तब उनका घर खाली ही था । तब परात्पर गुरु डॉक्टरजी कहने लगे, ‘‘आनेवाले समय में आपातकाल आरंभ होने पर मुंबई के सभी साधक मुंबई छोडकर कोंकण-गोवा में आएंगे । उस समय सभी साधकों का प्रबंध यहां करना संभव नहीं हुआ, तो वह सांगली में किया जा सकेगा ।’’
– श्री. चेतन राजहंस, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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