‘कश्मीर छोडें, अन्यथा मरने को तैयार रहें !’
वर्ष १९८९ के बाद आज भी कश्मीर में हिन्दुओं को ऐसी धमकियां मिल रही हैं, यह अभी तक की सभी पार्टियों की सरकारों के लिए लज्जास्पद !
वर्ष १९८९ के बाद आज भी कश्मीर में हिन्दुओं को ऐसी धमकियां मिल रही हैं, यह अभी तक की सभी पार्टियों की सरकारों के लिए लज्जास्पद !
हमेशा पाक के तलवे चाटकर भारत का विरोध करनेवाले खालिस्तानवादी पाक में सिखों की बार-बार होनेवाली हत्याओं के संबंध में चुप बैठते हैं ! इससे ऐसे लोगों को सिखों से कितना प्रेम है, यह उजागर होता है !
‘आतंकवाद विरोधी दिवस’ नहीं अपितु ‘आतंकवाद नष्ट किया दिवस’ मनाना महत्वपूर्ण है । उस दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। कश्मीर में अभी तक आतंकवाद समाप्त नहीं हुआ है । वहां अभी भी हिंदू मारे जा रहे हैं, इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है !
(जिहादी आतंकवादी पुलिस एवं प्रशासन को यही दिखाना चाहते हैं कि कश्मीर में अब हमारा ही राज है । सरकार ध्यान रखे, ‘‘जब तक पाक को नष्ट किया नहीं जाता, तब तक आतंकवाद नष्ट करना कठिन है’’ ! – संपादक)
हिन्दुओं को लगता है कि केंद्र में विगत ८ वर्षाें से भाजपा की सरकार होते हुए एवं धारा ३७० हटाने के पश्चात भी कश्मीर में आज भी हिन्दू असुरक्षित ही हैं, यह वस्तुस्थिति है और कश्मीरी हिन्दुओं का क्रोध आवश्यक है !
पंजाब में बढ़ते खालिस्तानी आतंकवाद को नष्ट करने के लिए केंद्र सरकार को अभी से ऐसे आतंकियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए !
भारत और कितने वर्ष जिहादी आतंकवाद सहन करेगा ? जिहाद के प्रायोजक पाक को समाप्त करना, यही इस समस्या का हमेशा के लिए उपाय है, यह स्वतंत्रता के उपरान्त सभी शासनकर्ताओं के ध्यान में न आना लज्जास्पद !
बडे पैमाने पर खालिस्तानी आतंकवादियों के पुनरुत्थान को कुचलने के लिए केंद्र सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए !
मैं मेरे कथन पर अडिग ! – जॉर्ज
क्या भारत की कोई संस्था इस प्रकार का प्रतिवेदन नहीं बना सकती ? यहां पर ऐसा अध्ययन क्यों नहीं करते ? भारत सरकार को भी ऐसा अन्वेषण करना चाहिए और विश्व स्तर पर इसका प्रसार करना चाहिए !