पाइप गैस की आपूर्ति बंद करने की धमकी देकर ऑनलाइन ठगी करनेवालों से सावधान !

‘महानगर गैस’ का लोगो (चिह्न) उपयोग कर की गई ठगी !

सामाजिक चेतना में होनेवाला परिवर्तन एवं उससे उत्पन्न आगामी आपातकाल का ज्योतिषशास्त्रीय विवेचन

‘वर्तमान में विश्व में युद्धजन्य परिस्थितियां बनी हुई हैं । वैश्विक व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) बदल रही है । वैश्विक व्यवस्था में होनेवाला यह परिवर्तन केवल एक संयोग नहीं है, यह समाज की चेतना (जागरूकता) में होनेवाले परिवर्तनों का दृश्य परिणाम है । समाज की चेतना में होनेवाले परिवर्तन और उनके आगामी समय में संभावित परिणामों का विवेचन इस लेख में ज्योतिषशास्त्र के दृष्टिकोण से किया गया है ।

शून्य से खडे हुए गोवा के वैभवशाली मंदिर !

गोवा के अधिकांश मंदिर अन्य राज्यों के मंदिरों की तुलना में अत्यंत प्रशस्त एवं स्वच्छ हैं । गोवा के जो कुछ प्रसिद्ध देवस्थान हैं, उनका इतिहास भी रोमांचकारी है । पुर्तगालियों ने गोवा पर ४५० वर्ष राज्य किया । पुर्तगालियों का जब गोवा में प्रभाव जमना आरंभ हुआ, तब सर्वप्रथम उन्होंने हिन्दुओं के मंदिरों को तोडना प्रारंभ किया ।

धर्मशास्त्र एवं अध्यात्मशास्त्र

सनातन भारत : समाज, राष्ट्र, धर्म एवं अध्यात्म के संदर्भ में प्रासंगिक सूत्रों पर भाष्य करनेवाला स्तंभ

स्त्रियों द्वारा व्यायाम को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक !

इस लेखमाला में हम स्त्रियों के लिए ‘जीवन के प्रत्येक चरण में व्यायाम कितना आवश्यक है’, यह समझ लेंगे ।

वजन बढना एवं स्त्रीरोग : आयुर्वेद का दृष्टिकोण

वर्तमान आधुनिक जीवनशैली में स्त्रियों में वजन बढने की समस्या गति से बढती हुई दिखाई दे रही है । यह समस्या केवल बाह्य सौंदर्य तक सीमित नहीं है, अपितु वह स्त्रियों के स्वास्थ्य पर तथा विशेषकर स्त्रीरोगों के बढने का बडा कारण बन रही है ।

सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर अत्यल्प होने के कारण

‘‘कु. मधुरा भोसले, श्री. निषाद देशमुख और श्री. राम होनप जैसे सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर कितने हैं ? यदि उनकी संख्या विशेष नहीं है, तो उसके क्या कारण हैं ?’’

मनुष्य जीवन की संकीर्णता से व्यापकता की ओर होनेवाली प्राकृतिक यात्रा दर्शानेवाले जन्मकुंडली के १२ स्थान !

हिन्दू धर्म में प्रत्येक बात का कितना गहनता से तथा सूक्ष्म विचार किया गया है, इसके उदाहरण के रूप में यह लेख प्रकाशित कर रहे हैं !

स्वबोध, मित्रबोध और शत्रुबोध !

‘स्वबोध, मित्रबोध एवं शत्रुबोध’, यह त्रिसूत्री मुख्यतः राष्ट्रवाद, संस्कृति एवं भूराजनीतिक संदर्भ में उपयोग की जाती है । किसी भी जीवंत समाज अथवा राष्ट्र को यदि प्रगति करनी हो और अपना अस्तित्व बनाए रखना हो, तो उसे इन ३ बातों का सटीक ज्ञान होना अनिवार्य है ।

युद्ध की तीव्रता बढने से पहले ही देशद्रोहियों को पकडने का (कॉम्बिंग ऑपरेशन) अभियान चलाएं !

पिछले एक महीने से भारत में प्रत्यक्ष रूप से युद्ध आरंभ नहीं हुआ है, तब भी खाडी क्षेत्र में चल रहे युद्ध का प्रभाव भारत पर पड रहा है । इसमें एक विशेष बात सामने आई है कि पिछले १५ दिनों में भारत के विभिन्न जिलों और सैन्य ठिकानों पर विदेशी जासूसों की गतिविधियां देखी गई हैं ।