भावपूर्ण धार्मिक विधियों के साथ संपन्न हुआ श्री राजमातंगी महायज्ञ समारोह !

श्री राजमातंगीदेवी के मूलमंत्रों से यज्ञ में आहुतियां समर्पित की गईं । इस समय ९६ प्रकार के १०८ द्रव्यों की आहुति दी गई । आहुति अर्पित करने के पीछे ‘देवी द्वारा दिया देवी को ही अर्पित करना’, यही भाव होता है !

वास्तुशास्त्र :व्याख्या एवं महत्त्व

वास्तुशास्त्र मनुष्य के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण घटक है । भगवान विश्वकर्मा ने उनके ग्रंथ में पहले गृह अर्थात घर के विषय में बताया है –

वास्तुदोषों के निवारण हेतु सुलभ आध्यात्मिक उपचार : वास्तुशुद्धि

वास्तु की रचना में परिवर्तन करना सामान्य व्यक्ति के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता । वास्तुदोषों के कारण वास्तु में उत्पन्न नकारात्मक स्पंदनों को दूर करने के लिए ‘वास्तुशुद्धि करना’ एक अत्यंत सुलभ एवं प्रभावी उपाय है ।

विभिन्न वेदपुराणों में मिलनेवाला वास्तुशास्त्र का उल्लेख

‘भागवत महापुराण’ में भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा से भगवान विश्वकर्मा द्वारा समुद्र में निर्मित द्वारकानगरी का वर्णन आया है । भारत में वास्तुशास्त्र का अत्यंत गहन अध्ययन किया गया है । भारत को वास्तुशास्त्रकारों की बडी परंपरा प्राप्त है । ‘मत्स्यपुराण’ में वास्तुशास्त्र के १८ आचार्याें का उल्लेख है ।

परिवार व्यवस्था, धर्मसंस्था एवं शिक्षाप्रणाली को साम्यवाद से संकट !

शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों को साम्यवाद से संकट !

अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !

अधिक मास आत्मशुद्धि एवं परोपकार के लिए विशेष काल होता है । इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि इस वर्ष का ज्येष्ठ अधिक मास आध्यात्मिक साधना, भक्ति, व्रत, उपवास, त्योहार, स्वास्थ्य एवं परोपकार इत्यादि के दृष्टिकोण से विशेष लाभकारी है ।

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अमृता विश्वविद्यापीठम् के निदेशक डॉ. यु. कृष्णकुमार से सद्भावना भेंट !

डॉ. कृष्णकुमार ने समिति के कार्यकताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘आप सभी सनातन धर्म के लिए निःस्वार्थभाव से पूर्णकालीन जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो बहुत ही दुर्लभ उदाहरण है तथा यही समय की मांग है ।

आपातकालीन स्थिति : ऊर्जा सुरक्षा, अति आवश्यक आपूर्ति एवं ऊर्जा की बचत !

युद्धकाल का सामना करने के लिए तैयारी के रूप में आज ही कृति करना आवश्यक !

धर्मनिरपेक्षता और हिन्दू राष्ट्र !

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी के साथ ‘प्राच्यम्’ नामक ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ के संस्थापक एवं मुख्य अधिकारी कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) ने ‘चेंज मेकर्स’ कार्यक्रम के अंतर्गत संवाद किया ।

समर्थ रामदासस्वामीजी को अभिप्रेत भारत की अद्वितीय मंदिर संस्कृति !

ईश्वरदर्शन मानव जीवन का प्रधान प्रयोजन सुनिश्चित होने पर भारतीयों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में मंदिर संस्थाएं एकदम से केंद्रस्थान पर जाकर बैठ गईं ।