अंधेरे में वास्तु का आकार बडा दिखाई देता है, जबकि वास्तु में दीप जलाने पर उसका आकार छोटा दिखाई देता है, इसका कारण
वास्तु एवं पंचतत्त्वों का एक-दूसरे से संबंध, वास्तु में अंधेरे एवं उजियाले का कक्ष पर परिणाम
वास्तु एवं पंचतत्त्वों का एक-दूसरे से संबंध, वास्तु में अंधेरे एवं उजियाले का कक्ष पर परिणाम
साधना के प्रयास करने पर ही भाव का अनुभव किया जा सकता है !
‘संगम टॉक्स’ हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की रक्षा, इतिहास, तत्त्वज्ञान, विरासत, भारतीय ज्ञान प्रणाली, विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, कला, पर्यावरण एवं प्रवास इत्यादि के लिए एक बडा व्यासपीठ बन गया है ।
सनातन संस्कृति के प्रवाह को निरंतर प्रवाहित रखने के संकल्प के साथ आयोजित इस सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में सहभागी होना यह भाग्यशाली क्षण है’, ऐसा भी श्री. शेखावत ने कहा ।
१४ दिसंबर को महोत्सव में संपन्न हुए पहले उद्बोधन सत्र के आरंभ में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित अंग्रेजी भाषा के ग्रंथ ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का जीवनचरित्र’ का लोकार्पण किया गया ।
धर्मांध अपने धर्म की सीख का पालन करते हैं, इसलिए पूरे संसार पर हावी हो गए हैं ।
इस अवसर पर भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया । तदुपरांत श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी ने ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की ।
राष्ट्रप्रेमी हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य में हम श्रीराम की वानरसेवा के वानरों की भांति सम्मिलित हैं, ऐसा भाव रखें !
बुद्धिप्रमाणवादियों एवं विज्ञान निष्ठों में यह अहंकार होता है कि ‘मुझे जो पता है, वही सत्य है’ तथा नया कुछ समझने की उनमें जिज्ञासा नहीं होती ।
धर्मशिक्षा और साधना के अभाव में जनता नीतीविहीन हो गई है, ऐसे भारत में भ्रष्टाचार, बलात्कार, दंगे आदि के अलावा और क्या हो सकता है ?