अष्टलक्ष्मियों की स्वरूपिणी होने की अनुभूति करानेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

अष्टलक्ष्मियों के ८ रूपों का आध्यात्मिक रहस्य, साथ ही मैं ‘इन आठों तत्त्वों के उन्हीं में (श्रीसत्शक्ति [श्रीमती] बिंदा नीलेश सिंगबाळजी में) कार्यरत होने की अनुभूति कैसे कर पाई ?’, इसे मैं कृतज्ञभाव से उनके चरणकमलों में समर्पित कर रही हूं ।

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी के कक्ष में स्थित देवताओं की मूर्तियों में हुए परिवर्तन तथा उनके कक्ष के विषय में प्रतीत हुए सूत्र

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी के कक्ष में स्थित सभी मूर्तियों का निरीक्षण करते समय कुछ मूर्तियों में मुझे प्रतीत हुए परिवर्तन यहां दिए हैं ।

जळगांव भ्रमण के समय श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के दैवीय अस्तित्व की साधकों को हुई प्रतीति !

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी जळगांव सेवाकेंद्र के लिए ली गई भूमि देखने नांद्रा गांव में गई थीं । वहां उन्होंने भूमिपूजन किया ।

वरमहालक्ष्मी व्रत के अवसर पर श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा दी गई आहुति की ज्वाला बनी कमलपुष्प समान !

‘वरमहालक्ष्मी व्रत’ के उपलक्ष्य में प्रातःकाल श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी अग्निहोत्र करते आहुति दी, उस समय उन्हें अग्नि की ज्वालाओं का आकार कमलपुष्प जैसा दिखाई दिया ।

भारत द्वारा पाकिस्तान पर ‘एयर स्ट्राईक’ करने के विषय में श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ को मिली पूर्वसूचना

तमिलनाडू के कांचीपूरम् में प्रवास के समय सायंकाल में तीव्र गति से तुफानी हवा बहने लगी थी । इस हवा की तीव्रता इतनी अधिक थी जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ‘युद्ध आरंभ होगा तथा यह भारत-पाकिस्तान युद्ध के माध्यम से तीसरे महायुद्ध का आरंभ ही है’, ऐसी संभावना लग रही थी ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का पू. (अधिवक्ता) हरि शंकर जैनजी को अलिंगन देते हुए छायाचित्र देखकर भगवान श्रीराम एवं श्री हनुमान की भावभेंट का स्मरण होना

पू. हरि शंकर जैनजी के मन में परात्पर गुरु डॉक्टरजी के प्रति हनुमानजी की भांति उच्च कोटि का भक्तिभाव होना

Prayagraj Kumbh Parva 2025 : अध्यात्म की अनुभूति लेने के लिए मैं महाकुंभक्षेत्र में आया हूं ! – श्रीकृष्ण की भूमिका निभानेवाले अभिनेता सौरभ राज जैन

१४४ वर्ष के उपरांत यह विशेष महाकुंभ हो रहा है । केवल देश के ही नहीं, अपितु विदेशों से भी अनेक श्रद्धालु यहां आ रहे ।

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं हरिहर मिलन

कैलाश पर्वत के निकट स्थित ‘चरणस्पर्श’ का तथा ‘मानसरोवर’ का अवलोकन

अत्यंत छोटे स्थान पर बहुत ही आनंद के साथ रहकर उस स्थान को मंदिर के गर्भगृह के स्पंदन प्रदान करनेवालीं श्री महालक्ष्मीस्वरूप श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी !

‘हम पिछले ७ वर्षों से श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी के साथ चेन्नई के सेवाकेंद्र में रह रहे थे । इस सेवाकेंद्र के विषय में तथा वहां रहते समय सीखने मिले सूत्र यहां दे रहा हूं ।

तीव्र आध्यात्मिक कष्ट होते हुए भी महर्षियों की आज्ञा के अनुसार कर्नाटक के हंपी में भगवान के दर्शन की सेवा पूर्ण करनेवालीं श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी !

देह की मर्यादाएं होते हुए भी श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी अत्यंत दुर्गम स्थानों पर जाकर वहां भक्तिभाव से पूजादि अनुष्ठान करती हैं । साधकों की रक्षा हेतु सप्तर्षि जहां कहेंगे, वहां जाने के लिए वे सदैव तैयार रहती हैं ।