अक्षय तृतीया के पर्व पर ‘सत्पात्र को दान’ देकर ‘अक्षय दान’ का फल पाएं !

‘१९.४.२०२६ को ‘अक्षय तृतीया’ है । इस दिन की कोई भी घटिका शुभमुहूर्त ही होती है । इस दिन किए जानेवाले दान और हवन का क्षय नहीं होता; अर्थात उनका फल हमें प्राप्त होता ही है । इसलिए बहुत-से लोग इस दिन बडी मात्रा में दानधर्म करते हैं ।

अध्यात्म के संदर्भ में लेखन अथवा लेख से संबंधित नियतकालिक / ग्रंथ हों, तो कृपया सनातन को भेजें !

साधकों को सूचना तथा पाठकों से निवेदन !

 हिन्दुओ, कालानुसार साधना के रूप में श्रीरामरक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें !

‘प्रभु श्रीराम एवं हनुमानजी एक ही सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं । अत: श्रीराम की उपासना में हनुमानजी का भी स्थान है । रामरक्षा में भी हनुमानजी का उल्लेख है । इसलिए पूजाघर में श्रीराम का चित्र या प्रतिमा हो, तो साथ में हनुमानजी का भी चित्र या प्रतिमा रखकर उनकी भी नित्य पूजा करें ।’

साधको, कालानुसार साधना के रूप में रामराज्य की स्थापना के लिए ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ यह नामजप करें !

वर्ष २०२६ की महाशिवरात्रि से व्यष्टि और समष्टि साधना करनेवालों द्वारा किया जानेवाला नामजप

साधको, कालानुसार साधना के रूप में रामराज्य की स्थापना के लिए ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ यह नामजप करें !

वर्ष २०२६ की महाशिवरात्रि से व्यष्टि और समष्टि साधना करनेवालों द्वारा किया जानेवाला नामजप

आध्यात्मिक मित्र ‘सनातन पंचांग’ एप का अधिकाधिक प्रसार करें !

‘सनातन पंचांग’ एप २०२६ मराठी, हिन्दी, कन्नड, तेलुगु, गुजराती, तमिल और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ।

विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आयोजित की जानेवाली प्रतियोगिताओं में विजेता छात्रों को पुरस्कार के रूप में सनतान के ग्रंथ एवं लघुग्रंथ दें  !

विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों से विनम्र अनुरोध !

श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सभी साधक प्रतिदिन १०८ बार ‘हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।’ इस महामंत्र का जाप करें

सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका में किए गए उल्लेख के अनुसार, सर्वत्र के सनातन के साधकों को युद्धकाल के लिए श्रीकृष्ण तथा रामराज्य के लिए श्रीराम के आशीर्वाद प्राप्त होना आवश्यक है ।

धनतेरस के शुभ अवसर पर धर्मप्रसार के कार्य हेतु ‘सत्पात्र-दान’ कर श्री लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें  !

सभी पाठकों, शुभचिंतकों तथा धर्मप्रेमियों से नम्र निवेदन !

पैसे का लेन-देन, आर्थिक अथवा भूमि से संबंधित लेन-देन करना, साथ ही विवाह सुनिश्चित करना आदि व्यक्तिगत बातें स्वयं के दायित्व पर करें !

सनातन संस्था अध्यात्मप्रसार, सामाजिक सहायता एवं राष्ट्ररक्षा हेतु कार्यरत है । इसमें स्वाभाविक ही व्यक्तिगत हितसंबंध संजोना नहीं आता; इसलिए किसी भी प्रकार के कार्याें के संबंध में व्यक्तिगत स्तर पर आवश्यक ध्यान रखकर उन्हें स्वयं के दायित्व पर करें, सभी से यह विनम्र अनुरोध है ।