नियमित व्यायाम हेतुएक सर्वोत्तम समय सुनिश्चित करें !

‘जब व्यायाम के लिए समय निकालने की बात आती है, तब हम व्यायाम को अंतिम प्राथमिकता देते हैं तथा उससे हमसे व्यायाम करना रह ही जाता है । किसी भी कार्य के लिए समय सुनिश्चित करने से ‘उसी समयावधि में हमें वह कृति करनी है’, इसका स्मरण रहता है तथा प्रतिदिन उन कृतियों को करने से हम उसके अभ्यस्त हो जाते हैं । कुछ कारणवश बीच में व्यायाम करना एक दिन चूक गया, तो चलता है; परंतु व्यायाम को यथाशीघ्र पुनः आरंभ करना महत्त्वपूर्ण है । ‘निर्धारित समय में अपनेआप ही व्यायाम कैसे होता है ?’, इसका अनुभव कर उसका आनंद लें !’
– कु. वैदेही शिंदे, भौतिकोपचार (फीजियोथेरपी) अध्येता, फोंडा, गोवा. (११.८.२०२४)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?