
‘दूध युक्त चाय पीने से पित्त बढता है । अल्पाहार के साथ हम चाय पीते हैं । अल्पाहार के पदार्थों में नमक होता है । नमक एवं दूध का संयोग रोगकारक है । इस संयोग को आयुर्वेद में ‘विरुद्ध आहार’ कहते हैं । कभी-कभार चाय लेना ठीक है; परंतु जो अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं उन्हें प्रतिदिन चाय लेने की आदत छोडनी होगी । अनेक लोगों के लिए यह आदत छोडना कठिन होता है । ऐसे लोग प्रारंभ में चाय की मात्रा आधी करें । आगे-आगे ऐसे करें कि यदि दिन में २ बार चाय ले रहे हों, तो एक बार ही लें । आगे एक दिन छोडकर एक दिन लें । जब अंतर्मन को लगता है कि चाय न पीने से कुछ अंतर नहीं पडता, तब चाय अपनेआप ही छूट जाती है ।’
– वैद्य मेघराज पराडकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?