मद्रास उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय से क्षमा याचना की !
उच्चतम न्यायालय के निर्देश देने के उपरांत भी एक याचिका को ६ वर्षों तक निलंबित रखने का प्रकरण !
उच्चतम न्यायालय के निर्देश देने के उपरांत भी एक याचिका को ६ वर्षों तक निलंबित रखने का प्रकरण !
कितने हिन्दू मुसलमानों की धार्मिक संस्थाओं में नौकरी के लिए अरजी लगाते हैं और उनको नौकरी दी जाती है ? नौकरी ना दिए जाने पर कितने हिन्दू इस प्रकार से न्यायालय में जाकर जवाब मांगते हैं ?
तमिलनाडु में नास्तिकवादी द्रमुक सरकार होने के कारण, उससे हिन्दुओं को न्याय मिलने की संभावना नहीं है । ऐसी घटनाएं स्थायी रूप से रोकने के लिए, सर्वदूर के हिन्दुओं को हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए दृढ संकल्प करना चाहिए !
इतने वर्षों से मंदिरों की भूमियों पर अतिक्रमण होने देने वाले तथा उसके कारण मंदिरों को लाखों करोड रुपए की हानि पहुंचाने वालों को आजीवन कारागृह में डालना चाहिए !
मंदिरों के धन का अनुचित उपयोग करना भी एक अपराध ही है । राज्य सरकार को इस विषय में संबंधित लोगों के विरुद्ध अपराध प्रविष्ट कर अभियोग चलाना चाहिए ।
तमिल विश्व की प्राचीन भाषा है । यह ईश्वरीय भाषा भी है । तमिल भाषा का जन्म भगवान शिव के डमरू से हुआ था ।पौराणिक कथा के अनुसार, शिव ने प्रथम अकादमी (प्रथम तमिल संगम) की अध्यक्षता की थी । शिव ने तमिल कवि के ज्ञान का परीक्षण करने के लिए थिरुविलयादल, यह खेल भी खेला । अर्थात्, तमिल भाषा देवताओं से जुडी हुई है ।
मस्जिदों और चर्च का सरकारीकरण कर, उससे प्राप्त धन का उपयोग मौलिक सुविधाओं के लिए करने का विचार धर्मनिरपेक्ष सरकारों द्वारा क्यों नहीं किया जाता ? क्या द्रमुक की सरकार इसका उत्तर देगी ?
आगम शास्त्र का अध्ययन करनेवाला ब्राह्मण बन जाता है । वर्णाें की अवधारणा को जानने के लिए गीता का अध्ययन करें । भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, वर्ण जाति के आधार पर नहीं, गुणों पर आधारित हैं ।
तमिलनाडु में मनमानी से मंदिरों के संबंध में निर्णय लेने वाली द्रमुक सरकार का निषेध । तमिलनाडु में हिन्दुओं को इसके विरोध में संगठित होकर संवैधानिक मार्ग से लडना चाहिए !
तमिलनाडु सरकार द्वारा मंदिरों में गैर-ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति का प्रकरण !