‘सिंध-हिन्द’ का (वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित राज्य का) सबसे प्राचीन आश्रम ‘शदाणी दरबार’ अर्थात भारत-पाकिस्तान के सिंधी समुदाय के हिन्दुओं की आस्था का केंद्र। इस पीठ की पंचम पीठाधीश्वर प.पू. माता साहिब हासीदेवी की द्विशताब्दीय जयंती के उपलक्ष्य में रायपुर (छत्तीसगढ) में १७ मई से २९ जुलाई २०२६ की अवधि में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है । इन ७० दिन के कार्यक्रमों में प्रतिदिन भारत एवं पाकिस्तान के श्रद्धालु सहस्रों की संख्या में शदाणी दरबार आ रहे हैं ।
इस दरबार के विद्यमान नवम् पीठाधीश्वर प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज के आमंत्रण पर सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी २० एवं २१ जुलाई २०२६ को शदाणी दरबार के कार्यक्रम में उपस्थित थीं । २० जुलाई को आयोजित नारीशक्ति सम्मेलन में, जबकि २१ जुलाई को प्रत्यक्षरूप से शदाणी दरबार में श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया, साथ ही छत्तीसगढ में सनातन संस्था के साधकों एवं हिन्दू जनजागृति समिति के माध्यम से धर्मकार्य करनेवाले धर्मप्रेमियों को आध्यात्मिक दिशादर्शन करनेवाला मार्गदर्शन किया । इस दौरे में उन्होंने विभिन्न उद्योगपतियों, मान्यवरों एवं राजनीतिक नेतृत्वों से मिलने के लिए समय दिया । केवल डेढ दिन का उत्तराधिकारीद्वयी का यह दौरा संपूर्णतः ईश्वरनियोजित अनुभव प्रदान करनेवाला सिद्ध हुआ ।

१. उत्तराधिकारीद्वयियों के मार्गदर्शन के समय श्रद्धालुओं को संतवाणी का प्रभाव प्रतीत होना ।
नारीशक्ति सम्मेलन में आरंभ में श्रोतागण आपस में बातें कर रहे थे, परंतु जैसे ही श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी ने बोलना आरंभ किया, वैसे ही संपूर्ण वातावरण में प्रचंड चैतन्य फैल गया । सभी श्रोता शांति से एवं अंतर्मुख होकर विषय सुनने लगे तथा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर करने लगे । कोई सुईं भी गिरी, तब भी उसकी आवाज होगी, इतनी शांति वहां थी । संतवाणी का तथा उनके अस्तित्व का समाज पर कैसे सकारात्मक प्रभाव पडता है, इसका इस समय प्रत्यक्ष अनुभव हुआ ।
अखिल सिंधी समाज को सनातन संस्था से जोडनेवाला सद्गुरुद्वयी का दौरा ।

‘सनातन संस्था’ एवं ‘शदाणी दरबार’ अर्थात सनातन धर्मियों को सनातन संस्कार देनेवाले धर्मपीठ हैं । राजीम कुंभपर्व से लेकर अर्थात वर्ष २०१३ से अर्थात विगत १३ वर्षाें से इन दोनों आध्यात्मिक संस्थाओं में धर्मबंधुत्व बढा है, वह अभूतपूर्व ही है । प्रयाग, हरिद्वार एवं राजीम का कुंभपर्व, गोवा में होनेवाला वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव, दिल्ली का शंखनाद महोत्सव, साथ ही छत्तीसगढ में होनेवाले हिन्दू अधिवेशन में ये दोनों संस्थाएं एकत्रित होकर धर्म रक्षा का कार्य कर रही हैं । इसी धर्म बंधुता के संबंध से शदाणी दरबार के नवम् पीठाधीश्वर प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज ने सनातन संस्था की श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी को छत्तीसगढ आमंत्रित किया था । इन सद्गुरुद्वयी का यह दौरा अखिल सिंधी समाज को सनातन संस्था से जोडनेवाला सिद्ध हुआ ।
२. प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज की धर्मपत्नी पू. (श्रीमती) दीपिकादीदीजी द्वारा व्यक्त कृतज्ञता ।
पू. (श्रीमती) दीपिकादीदीजी २१ जुलाई को शदाणी दरबार में मनोगत व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘इन दोनों गुरुमाताओं की वाणी अत्यंत मधुर, रसीली एवं सुगम है । उनकी वाणी सुनकर मैं स्वयं अत्यंत प्रभावित हूं, इसीलिए मैं आज पुनः इस कार्यक्रम का लाभ उठाने हेतु यहां आई हूं । उनकी वाणी का प्रभाव सभी श्रोताओं एवं साधकों पर सुस्पष्टता से प्रतीत होता है ।’’ अंततः उन्हें यह अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘आप यहां पुनःपुनः पधारकर हम सभी को उपकृत करें ।’’
३. सद्गुरुद्वयी के मार्गदर्शन से प्रभावित सिंधी समुदाय के मान्यवर सद्गुरुद्वयी से मिलने के लिए इकट्ठा होना ।
नारीशक्ति सम्मेलन के उपरांत सद्गुरुद्वयी के मार्गदर्शन से प्रभावित एक उद्योगपति, संत एवं मान्यवर उनसे मिलने के लिए आए थे । जुनागढ के एक संत ने उनके परिसर में भी इसीप्रकार का मार्गदर्शन करने हेतु श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी को आमंत्रित किया । पाकिस्तान से आए एक उद्योगपति ने आस्थापूर्वक आमंत्रित करते हुए कहा, ‘‘पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हिन्दुओं का मार्गदर्शन करने हेतु आप आएं ।’ पाकिस्तान के कुछ उद्योगपतियों ने सद्गुरुद्वयी को पाकिस्तान के तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों का दर्शन कराने हेतु संपूर्ण सहायता करने का आश्वासन दिया । दो दिन के इस कार्यक्रम में सिंधी समुदाय के मान्यवरों ने आस्थापूर्वक सनातन संस्था का कार्यं जान लिया, साथ ही गोवा आकर आश्रम देखने की इच्छा व्यक्त की ।
सनातन संस्था तथा उसकी आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी सद्गुरुद्वयियों के मार्गदर्शन के विषय में प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज के गौरवाद्गार ।

१. सनातन संस्था के प्रति गौरवोद्गार – सनातन संस्था का मुख्यालय गोवा में है तथा यह संस्था संपूर्ण देश में कार्यरत है । सनातन संस्था का मुख्य उद्देश्य हमारी वैदिक सभ्यताओं, भारतीय संस्कारों एवं गुरुपरंपरा को प्रसारित करना है , संपूर्ण विश्व में भारत को आध्यात्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ बनाने हेतु तथा दिव्य विचारों का प्रचार करने हेतु सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने इस संस्था की स्थापना की । यह एक अद्भूत संस्था है, जहां साधकों को उनके द्वारा आध्यात्मिक उन्नति किए जाने के उपरांत संत एवं सद्गुरु कहा जाता है । वास्तव में यही हमारी ऋषि परंपरा है, तो समर्पित लोगों को धर्म के रक्षक में आगे लाती है ।

२. श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी के प्रति गौरवोद्गार । प.पू. माता साहिब हासीदेवीजी की २०० वें जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में भारत की एक महत्त्वपूर्ण संस्था सनातन संस्था की गुरुमाताओं को आमंत्रित करने की प्रेरणा मिली ।
अ. आज सनातन संस्था की जो गुरुमाताएं यहां पधारी हैं, उनका मार्गदर्शन आप सभी ने सुना है । आप उनकी ओर देखिए तथा उनका दर्शन कीजिए। उनके विषय में मुझे संस्कृत भाषा में एक रचना सूझी, उसे मैं पढकर सुनाता हूं । ‘अति सरला, अति मृदुला, गृह कुशला । सा अतुला, मम माता देवता ।।’ (अर्थ : वे अत्यंत सादगीपूर्ण एवं सरल स्वभाव की हैं, वे अत्यंत कोमल (मृदू) हैं, वे गृहकार्य में अत्यंत कुशल हैं एवं वे अतुलनीय हैं । (उनकी तुलना किसी से भी नहीं हो सकती, ऐसी मेरी माताएं तथा यहीं मेरी देवताएं हैं ।)
"We need to follow a spiritual and sattvik way of daily living. Maintain purity in our homes so that every family member imbibes sattvik thoughts."
🎙️Shrisatshakti (Mrs) Binda Singbal ji,
Spiritual Heir of the founder of Sanatan Sanstha, Sachchidananda Parabrahman (Dr)… pic.twitter.com/A7jjcOB7wg
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) July 23, 2026
आ. सनातन संस्था की गुरुमाताओं ने सनातन धर्म के व्यावहारिक पहलुओं को अत्यंत कुशलता से रखा है । भारतीय नारी के स्वरूप को देवी के रूप में प्रस्तुत करने की इनकी जो अत्यंत भावपूर्ण एवं अतिमधुर पद्धति है, उसे सुनते समय ऐसा लग रहा था कि मानो कोई देवी ही बोल रही है, साक्षात् देवी उपदेश कर रही हैं तथा वे अपने बच्चों को समझा रही हैं ।
"Every woman carries within her the divine Shakti -the embodiment of Goddess Durga. This sacred power is awakened through dedicated Sadhana (spiritual practice)."
🎙️Shrichitshakti (Mrs) Anjali Gadgil ji,
Spiritual Heir of the founder of Sanatan Sanstha, Sachchidananda… pic.twitter.com/oRrGzxAKA0
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) July 23, 2026
इ. एक सच्चिदानंद अवस्था में विद्यमान डॉ. आठवलेजी गोवा में हैं तथा आप उनकी आध्यात्मिक उत्तराधिकािरणियां हैं, ‘सत्’ एवं ‘चित्’ ,आप सत्यरूपा, शक्ति-ज्ञानरूपा, सरस्वतीजी के समान मधुर भाषण करनेवाली माता के समान, उपदेश देनेवाले संतों के स्वभाव से युक्त, सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करनेवालीं, शिक्षिका के समान, शक्तिसमान एवं देवीसमान भी हैं । गुरुदेवजी ने जैसे इन्हें नाम दिया है (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने) वैसे ही उनकी वेशभूषा, वैसा ही उनका स्वभाव, वैसा ही आकर्षण,साथ ही ममता का दिव्य रूप ,हम स्वयं को इसलिए धन्य मानते हैं कि इस नारीशक्ति सम्मेलन में हमने हमारे भारतीय स्वरूप की गुरुमाताओं को यहां बुलाया है ।
४. ‘सनातन संस्था’ एवं ‘शदाणी दरबार’ एक ही परिवार होने की अनुभूति ।
दोनों सद्गुरुद्वयी का शदाणी दरबार का यह पहला ही दौरा था, परंतु प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज के शिष्य श्री. बंटी छाबडा, श्री. सुमित चावला, श्री. अमर शदाणी एवं अन्य सहयोगियों ने अत्यंत भावपूर्ण पद्धति से सद्गुरुद्वयी की सेवा की । ‘सद्गुरुद्वयी हमारे ही परिवार की संत हैं’, इस भाव से उन्हें फलाहार देना, उनके चरणों में बैठकर छायाचित्र खींचना तथा खुले मन से उनसे संवाद करना जैसी सेवाएं उन्होंने अत्यंत निकटता से एवं अंतःकरण से की । सभी श्रद्धालुओं की बातों में एक वाक्य बार-बार आ रहा था, वह था ‘हम पहली बार आपसे मिल रहे हैं, ऐसा लगता ही नहीं है । हम अनेक बार मिले हैं । आपकी बातों से एवं आचरण से सनातन संस्था एवं शदाणी दरबार एक ही परिवार है, इसकी हम प्रत्यक्ष अनुभूति कर रहे हैं ।’
– श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था.
छत्तीसगढ के धर्मकार्य को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करनेवाला सद्गुरुद्वयी का दौरा ।
वारकरियों को ‘घुसखोर’ (घुसपैठिया) कहकर अपमानित करने वालों का सार्वजनिक विरोध, एवं हिंदुत्वनिष्ठ संतों का भव्य सम्मान किया जाएगा ! – श्री सुनील घनवट, हिन्दू जनजागृति समिति
साधकों को सूचना : सनातन संस्था के नाम से आने वाले फर्जी ई-मेल से सावधान रहें !
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।