गुरुपूर्णिमा विशेषांक

‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी श्रेष्ठतम गुरुपद पर आरूढ हैं । इस पद पर स्थित होकर वे धर्मनिष्ठों का धर्मगुरु, साधकों का मार्गदर्शक गुरु, शिष्यों का आत्मगुरु व संपूर्ण विश्व का विश्वगुरु के रूप में निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं । ऋषियों ने वेदों के आधार पर स्मृतियों की रचना की, उसी प्रकार श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी तथा श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में तैयार हुईं हैं । सनातन के तीनों गुरुओं के प्रति जितनी भी कृतज्ञता व्यक्त करें, अल्प है । धर्मसंस्थापना के शिवधनुष का समर्थतापूर्वक वहन करने हेतु साधकों को आवश्यक मानसिक एवं आध्यात्मिक बल मिले तथा उन्हें गुरुचरणों का निरंतर स्मरण बना रहे, ऐसी गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में तीनों गुरुओं के श्री चरणों में प्रार्थना !’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक स्तर के अनुसार, उनके विभिन्न समय के छायाचित्र से उनके सगुण-निर्गुण स्पंदनों का सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी द्वारा किया अभ्यास