हिन्दी पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ से संबंधित सेवा करते समय ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी साथ हैं’, इसके संदर्भ में साधिका को हुई अनुभूतियां

‘नवंबर २०२१ में मेरी सहसाधिका दीपावली के निमित्त घर गई थी । उस समय हिन्दी पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ से संबंधित ‘नियोजन, संकलन, संरचना करने तथा पाक्षिक छपाई के लिए भेजने’ की सेवाएं करते समय मुझे हुई अनुभूतियां यहां प्रस्तुत हैं ।

आनंदप्राप्ति के लिए साधना करना ही आवश्यक ! – वैभव आफळे, समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति

‘‘प्रारब्धभोग भोगना तथा ईश्वरप्राप्ति करना ही मनुष्यजीवन का लक्ष्य है, उसे साध्य करने के लिए साधना करना ही आवश्यक है ।

साधको, कलियुग में भगवद्गीता समान नियतकालिक ‘सनातन प्रभात’ का पठन और अध्ययन नियमित करें !

‘बहुत से साधक नियतकालिक ‘सनातन प्रभात’ नहीं पढते, यह ध्यान में आया है । ऐसे साधक ध्यान दें कि ‘उनमें सीखने की वृत्ति का अभाव है’ और उसे बढाने के लिए प्रयत्न करें ।

कल, ८ नवंबर को खग्रास चंद्रग्रहण

मंगलवार (८ नवंबर) के दिन भारत सहित संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के पूर्वी प्रदेश और संपूर्ण दक्षिण अमेरिका में ग्रहण दिखने वाला है । भारत में कहीं भी ग्रहणस्पर्श नहीं दिखेगा ।

राखीपूर्णिमा के दिन बहन को चिरंतन ज्ञानामृत से युक्त सनातन के ग्रंथ भेंट कर, साथ ही राष्ट्र-धर्म के प्रति अभिमान बढानेवाले सनातन प्रभात की पाठिका बनाकर अनोखा उपहार दीजिए !

बहन के मन पर साधना का महत्त्व अंकित कर उसे उसके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लानेवाले ‘सनातन प्रभात’ की पाठक बनाना और उसे उसमें दी जानेवाली अमूल्य जानकारी पढने के लिए प्रेरित करना, उसके लिए इससे अधिक श्रेष्ठ उपहार अन्य क्या हो सकता है ?

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का महर्षि के प्रति शिष्यभाव एवं महर्षि का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति ‘श्रीमन्नारायण के अवतार’ में आदरभाव !

रथोत्सव के दिन सवेरे सप्तर्षियों का संदेश आया, ‘श्रीमन्नारायण स्वरूप गुरुदेवजी ने हम सभी की प्रार्थना सुन ली है । प्रकृति अनुकूल हो गई है । मेघ पूर्ण रूप से गए नहीं थे; गुरुदेवजी ने उन्हें साधकों की दृष्टि से दूर ले जाकर रखा था । रथोत्सव समाप्त होने पर ये मेघ पुन: बरसेंगे ।

‘सनातन प्रभात’ के ‘ई-पेपर’ का ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास’ के कोषाध्यक्ष प.पू. स्वामी गोविंददेव गिरि महाराजजी के करकमलों द्वारा विमोचन !

देश में हो रहे परिवर्तनों में ‘सनातन प्रभात’ का अत्यधिक योगदान है ! – प.पू. स्वामी गोविंददेव गिरि महाराजजी

‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक बहुत शीघ्र उपलब्ध होंगे ‘ई-पेपर’ के रूप में !

यह बताते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है कि ‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक के ऑनलाइन संस्करण बहुत शीघ्र डिजिटल न्यूजपेपर अर्थात् ‘ई-पेपर’के रूप में प्रकाशित होनेवाले हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

बुद्धिप्रमाणवादियों को यह अहंकार होता है, ‘मानव ने विभिन्न यंत्रों का आविष्कार किया ।’ उन्हें यह ध्यान में नहीं आता कि ईश्वर ने जीवाणु, पशु, पक्षी ७० से ८० वर्ष चलनेवाला एक यंत्र अर्थात मानव शरीर जैसी अरबों वस्तुएं बनाई हैं । क्या उनमें से एक भी वैज्ञानिक बना पाए हैं ?