हिन्दी पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ से संबंधित सेवा करते समय ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी साथ हैं’, इसके संदर्भ में साधिका को हुई अनुभूतियां
‘नवंबर २०२१ में मेरी सहसाधिका दीपावली के निमित्त घर गई थी । उस समय हिन्दी पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ से संबंधित ‘नियोजन, संकलन, संरचना करने तथा पाक्षिक छपाई के लिए भेजने’ की सेवाएं करते समय मुझे हुई अनुभूतियां यहां प्रस्तुत हैं ।