सनातन संस्था के कार्य हेतु ज्ञानबल एवं चैतन्यबल की आपूर्ति करनेवाली सनातन की ग्रंथसंपदा !

सनातन के ग्रंथों में दिए ज्ञानामृत का कार्यान्वयन कर १.२.२०२४ तक १२२ साधकों ने ‘संतपद’ प्राप्त किया है तथा १,०५४ साधक ‘संतपद’ प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर हैं । सनातन के अनेक संत एवं उन्नत साधक धर्मप्रचारक के रूप में सेवारत हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा संकलित ग्रंथों में समाहित लेखन के प्रकार ‘मेरे द्वारा संकलित ग्रंथों में निम्न ३ प्रकार का लेखन है –

साधना आरंभ करने पर ‘ध्यान से उत्तर मिल सकते हैं’, यह ज्ञात होने पर मैं मेरी अधिकतर शंकाओं के उत्तर ध्यान से प्राप्त करता था । उसके कारण सूक्ष्म स्तर का वह ज्ञान पृथ्वी पर उपलब्ध किसी भी ग्रंथ में नहीं है ।

इंदौर तरुण जत्रा प्रदर्शन में सनातन संस्था की ओर से अध्यात्मप्रसार !

इस मेले में सनातन संस्था की ओर से धर्म, अध्यात्म, बालसंस्कार आदि विभिन्न विषयों पर ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई गई । अनेक इंदौरवासियों ने इसका लाभ लिया ।

शिवजी की उपासना भावपूर्ण एवं शास्त्रोक्त पद्धति से सिखानेवाले सनातन के ग्रन्थ !

देवता की उपासना का शास्त्र समझ में आने पर देवता की उपासना संबंधी श्रद्धा बढती है । श्रद्धा से उपासना भावपूर्ण होती है एवं भावपूर्ण उपासना ही अधिक फलदायी होती है । इसके लिए यह ग्रन्थमाला पढें !

युवको, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के चैतन्यदायक ग्रंथकार्य की ध्वजा फहराते रहने हेतु ग्रंथ-निर्मिति की सेवा में सम्मिलित हों !

ग्रंथसेवा के अंतर्गत संकलन, अनुवाद, संरचना, मुखपृष्ठ-निर्मिति, ग्रंथों की छपाई से संबंधित सेवाएं आदि विभिन्न सेवाओं में सम्मिलित होने हेतु इच्छुक युवक अपनी जानकारी सनातन के जिलासेवकों के माध्यम से भेजें ।

युवको, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के चैतन्यदायी ग्रंथकार्य का ध्वज ऊंचा रखने हेतु ग्रंथ-निर्मिति के कार्य में सम्मिलित हों !

ग्रंथसेवा के अंतर्गत संकलन, भाषांतर, संरचना, मुखपृष्ठ-निर्मिति इत्यादि विभिन्न सेवाओं में सम्मिलित होने के इच्छुक युवक अपनी जानकारी सनातन के जिलासेवकों के माध्यम से भेजें ।

सनातन का श्रीराम ग्रंथ ‘ई-बुक’ स्वरूप में उपलब्ध !

श्रीरामजी की गुणविशेषताएं, रामायण की कुछ घटनाओं का भावार्थ ऐसी जानकारी पाने हेतु ई-बुक आज ही डाउनलोड करें ।

देवताओंकी उपासना भक्तिभावसे करनेके लिए बतानेवाले सनातनके लघुग्रन्थ

श्रीरामकी विविध गुण-विशेषताएं क्या हैं ?, रामायणके कुछ नामोंका भावार्थ, रामायणके अनेक प्रसंगोंका भावार्थ ये सब पढने के लिए अवश्य पढिये लघुग्रन्थ ‘श्रीराम’

भीषण आपातकाल आरंभ होने से पूर्व ही सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ग्रंथ-निर्मिति के कार्य में सम्मिलित होकर शीघ्र ईश्वरीय कृपा के पात्र बनें !

ग्रंथसेवा के अंतर्गत संकलन, अनुवाद, संरचना, मुखपृष्ठ-निर्मिति, मुद्रण इत्यादि विभिन्न सेवाओं में सम्मिलित होने की इच्छा रखनेवाले अपनी जानकारी सनातन के जिलासेवक के माध्यम से भेजें ।