धार्मिक कृत्यों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार
देवालयमें देवताके प्रत्यक्ष दर्शनसे पूर्वके कृत्योंका अध्यात्मशास्त्र

- देवालय की रचना कैसी हो ?
- देवालय के कलश को नमस्कार क्यों करें ?
- पैर धोकर ही देवालय में प्रवेश क्यों करें ?
- देवालय का घण्टा यथासम्भव क्यों न बजाएं ?
‘ऑनलाइन’ खरीदने हेतु : SanatanShop.com
संपर्क क्र. : 9322315317
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?