श्रीराम (अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन एवं उपासना)

- रामायण शब्दका अर्थ क्या है ?
- राम ‘श्रीराम’ क्यों कहलाने लगे ?
- श्रीरामकी विविध गुण-विशेषताएं क्या हैं ?
- रामायणके कुछ नामोंका भावार्थ
- रामायणके अनेक प्रसंगोंका भावार्थ
- श्रीरामका मंत्र एवं नामजपका भावार्थ
- श्रीरामका सरयू नदीमें देहत्याग करना
श्रीरामरक्षास्तोत्र एवं हनुमानचालीसा (अर्थसहित)
स्तोत्रमें देवताकी स्तुतिसहित पाठ करनेवालोंके सर्व ओर सुरक्षा-कवच निर्माण करनेकी शक्ति भी होती है । स्तोत्रोंकी फलश्रुतिके सन्दर्भमें रचयिताके संकल्पके कारण, स्तोत्रपाठसे इच्छापूर्ति, वैभव, पापनाश आदि फलप्राप्ति होती है ! अतएव स्तोत्रका अर्थ समझकर पाठ करें !
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?