हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए कानून लाया जाए ! – विहिप की केंद्र एवं सभी राज्य सरकारों से मांग
धर्मांतरण विरोधी कानून की भी मांग !
धर्मांतरण विरोधी कानून की भी मांग !
मदरसों और मस्जिदों की संख्या चौगुनी होने तक क्या पुलिस, सुरक्षा और प्रशासन सो रहे थे ? उनके विरुद्ध अभी भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है ?
इससे यह स्पष्ट होता है, कि तीर्थ क्षेत्रों के सरकारीकरण के विरोध में हिन्दुओं की भावनाएं कितनी प्रखर हैं ! क्या केंद्र और सभी राज्य सरकारें अब मंदिरों का व्यवस्थापन भक्तों को सौंपेगी ?
मंदिरों के सरकारीकरण के पश्चात, मंदिर प्रबंधन मंडलों द्वारा चलाए जा रहे महाविद्यालयों पर भी उसका ऐसा परिणाम दिखाई दे रहा है ; यह ध्यान में लेते हुए सरकारीकरण का विरोध करें ।
क्या हिन्दू कभी फकीर का वेश धारण कर भीख मांगते हैं ? ऐसी स्थिति में, धर्मांधों द्वारा ऐसा क्यों किया जा रहा है ? ‘हिन्दुओं से भीख लेने के लिए अथवा उनकी हत्या के लिए ?’, यह उजागर होना चाहिए !
स्मरण रहे, कि जीवन के उद्देश्य के संबंध में लोगों को शिक्षित न करने और समाज को सुखी जीवन जीने के लिए अनुकूल परिस्थिति निर्माण न करने के कारण होने वाली इन आत्महत्याओं के लिए, अब तक के सभी शासक उत्तरदायी हैं !
जब तक पाकिस्तान का नाश नहीं किया जाता, तब तक ऐसी घटनाओं को रोकना असंभव है ! इसपर अब लक्ष्य केंद्रित करना चाहिए !
हिन्दू जनजागृति समिति का ‘हलाल मुक्त दिवाली’ अभियान
जनता के स्वास्थ्य से खेलने वाली ऐसी कंपनियों पर केंद्र सरकार को अब तो प्रतिबंध लगाना चाहिए, ऐसी जनता की मांग है !
देश की राजधानी में यह स्थिति होगी, तो अन्य राज्यों और शहरों की स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना आती है !