गाय को राष्ट्रमाता घोषित करो ! – पू. किशोरशास्त्री दवे

‘इक्वल राइट फॉर हिन्दुज’ की ओर से सभा का आयोजन

बाएं से श्री. राजकुमार जाजू, संबोधित करते हुए पू. किशोरशास्त्री दवे, श्री. एम्. नागेश्वर राव एवं अधिवक्ता शिल्पन गावकर

मुंबई – अब तक गाय पर अनेक बार संशोधन (शोध) हुआ है तथा आगे भी होता रहेगा । देवताओं एवं ऋषि-मुनियों ने भी गाय की महिमा का वर्णन किया है । अंग्रेज गाय की चर्बी कारतूसों में उपयोग करने वाले थे; इसलिए क्रांतिकारी मंगल पांडे ने बलिदान दिया । वर्ष १९६६ में प.पू. करपात्री स्वामीजी के नेतृत्व में हुए गोरक्षा आंदोलन में अनेक संतों एवं गोरक्षकों ने बलिदान दिया । ‘गाय की हत्या करनेवालों के साथ ही उसका समर्थन करनेवालों को भी पाप लगता है’, ऐसा वेदों में बताया गया है; परंतु आज प्रतिदिन ७० से ८० सहस्र गायों की हत्या होती है । वर्ष २०१४ में गोमांस निर्यात में भारत ९वें स्थान पर था । अब ब्राजील के उपरांत दूसरे स्थान पर है । इसलिए समय रहते ही गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करो, साथ ही गोहत्या प्रतिबंध, गोसंरक्षण, गोप्रतिष्ठा करो, ऐसा आवाहन पू. किशोरशास्त्री दवे ने किया ।

वे बोरिवली में ‘इक्वल राइट फॉर हिन्दुज’ की ओर से कुछ दिन पूर्व ही संपन्न हुई सभा में बोल रहे थे । इस समय केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (‘सीबीआई’ के) पूर्व निदेशक श्री एम. नागेश्वर राव, ‘स्वस्तिश्री त्रिवेणी फाउंडेशन’ के श्री राजकुमार जाजू और अधिवक्ता (वकील) शिल्पन गावकर ने भी उपस्थितों को संबोधित किया । लेखिका और ‘इक्वल राइट फॉर हिन्दुज’ की संस्थापिका सौ. रति हेगडे के साथ उनके सहयोगियों ने कार्यक्रम का सफल आयोजन किया । इस कार्यक्रम में गोरक्षक तथा हिन्दू धर्मप्रेमी बडी संख्या में उपस्थित थे ।

हिन्दुओं के मंदिर सरकार-मुक्त होने चाहिए ! – एम. नागेश्वर राव, पूर्व निदेशक, सीबीआई

‘सीबीआई’ के पूर्व निदेशक एम. नागेश्वर राव ने तथ्य अन्वेषण (फैक्ट फाइंडिंग) रिपोर्ट प्रस्तुत की । वे बोले, “भारत देश मांस निर्यात में सबसे आगे आ रहा है तथा बाहर के लोगों को मांस खिलाने का सरकार का उद्देश्य होने का दिखाई दे रहा है । वर्तमान स्थिति में देशभर के २ लाख मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं; परंतु चर्च एवं मस्जिद सरकार ने नियंत्रण में नहीं लिए हैं । हमारे मंदिर मुक्त होने चाहिए ।”

गोरक्षा के लिए सभी लोग आगे आएं (पहल करें) ! – राजकुमार जाजू, स्वस्ति श्री त्रिवेणी फाउंडेशन

सनातन धर्म प्राचीन है । सनातन धर्म पर मुगलों, अंग्रेजों आदि सभी के बहुत आक्रमण हुए; परंतु सनातन धर्म अभी भी टिका हुआ है । अंग्रेजों ने जातिभेद निर्माण करके फूट डाली । पहले ऋषि-मुनियों को राजाश्रय था । पूर्व के युग में राजाओं के पास गायों के झुंड (गोधन) होते थे । अब गोमाता संकट में है, गोरक्षा के लिए सभी को आगे आना चाहिए ।

‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप’ का विरोध करो ! – अधिवक्ता शिल्पन गावकर

महाराष्ट्र सरकार की ओर से प्रस्तावित किया गया ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप २०२६’ कुछ दिनों पूर्व ही स्थगित कर दिया गया । इस कानून को मंदिर ट्रस्टियों एवं मंदिर क्षेत्र में कार्य करनेवालों का विरोध होने के कारण सरकार ने यह निर्णय लिया । केवल हिन्दुओं के देवस्थानों की साढे चार लाख हेक्टेयर इनाम भूमि नियंत्रण में लेने की सरकार की नीति थी; अन्य धर्मीयों को इस कानून से पूर्णतः छूट दी गई थी । भविष्य में भी सरकार इस कानून का प्रस्ताव ला सकती है । मंदिर ट्रस्टी एवं हिन्दू संगठन सतर्क रहकर, यदि प्रस्तावित कानून मंदिरों के स्थान छीननेवाला होगा, तो तीव्र विरोध करें ।