भारतवर्ष – आर्यावर्त का विस्तार !

भारतीय आर्ष वाङ्मय विश्व का सर्वाधिक प्राचीन साहित्य है, जिसमें ‘ऋग्वेद’ को सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है । भारतीय आर्ष वाङ्मय में विश्व के सभी प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं । 

(और इनकी सुनिए…) ‘जिनके आंखें ही नहीं हैं, उनके पाप कितने होंगे ।’ – Chandrashekhar Azad Ravan

बरेली में १७ सितंबर को हुई एक सभा में चंद्रशेखर बोल रहे थे ।

Premanand Maharaj – वैदिक मंत्र वस्त्राें पर नहीं, अपितु हृदय में रेखित करना चाहिए !

मंत्रजाप लिखे वस्त्र पहनने के लिए संत प्रेमानंद महाराज द्वारा विरोध !

रामायण-महाभारत का खगोलशास्त्र के आधार पर खोज करनेवाले अमेरिका के जगप्रसिद्ध शोधकर्ता डॉ. नीलेश ओक !

डॉ. नीलेश नीलकंठ ओक अमेरिका में स्थायी जगप्रसिद्ध भारतीय इतिहास शोधकर्ता हैं । रामायण एवं महाभारत के कालनिर्धारण पर किए गए शोधकार्य के लिए वे विशेषरूप से प्रसिद्ध हैं ।