भगवान श्रीराम के अपमान से बांग्लादेश के हिन्दू आक्रोशित !

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश में भगवान श्रीराम के अपमान के विरोध में हिन्दू समुदाय ने १९ जून की रात ढाका में मशाल जुलूस निकाला । इस जुलूस का नेतृत्व करने वाले हिन्दू विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पूर्व ही कट्टरपंथी मुस्लिमों की एक हिंसक भीड ने भगवान श्रीराम की प्रतिमा पर जूता रखकर उनका अपमान किया । यह भगवान श्रीराम एवं हिन्दू समुदाय का घोर अपमान है । यदि ७२ घंटे के भीतर दोषियों को बंदी नहीं बनाया गया, तो धार्मिक प्रकरणों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा जाएगा । साथ ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भेंट के अतिरिक्त विभिन्न रैलियां एवं कार्यक्रम आयोजित कर विरोध प्रकट किया जाएगा ।
१. ढाका का विशाल मशाल जुलूस शाहबाग चौराहे से आरंभ होकर शाहबाग स्क्वायर, मोतेश्वर भवन मार्ग से होते हुए नेशनल प्रेस क्लब तक पहुंचा । जुलूस में सम्मिलित लोग “जय श्रीराम” तथा अन्य उदघोष कर रहे थे ।
२. भगवान श्रीराम के अपमान के विरोध में १९ जून की सुबह ढाका में दो अलग-अलग कार्यक्रम भी आयोजित किए गए । “हिन्दू महाजोत” नामक संगठन के दो गुटों ने अलग-अलग कार्यक्रम किए । इनमें से एक कार्यक्रम नेशनल प्रेस क्लब के सामने तथा दूसरा ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी में पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से आयोजित किया गया ।
३. नेशनल प्रेस क्लब के सामने मानव श्रृंखला बनाकर हिन्दुओं ने कट्टरपंथियों का विरोध किया । भगवान श्रीराम के अपमान के विरोध में “नेशनल कमिटी फॉर पूजा सेलिब्रेशन्स” ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है ।
४. ढाका की घटना से पहले उत्तरी बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाडी में भी हिन्दुओं ने भगवान श्रीराम के अपमान के विरुद्ध प्रदर्शन किया था ।
सभी ६४ जिलों में बनाए जाएंगे श्रीराम मंदिर !जुलूस में सम्मिलित हिन्दुओं ने कहा कि अब केवल पलाशबाडी में ही नहीं, अपितु बांग्लादेश के सभी ६४ जिलों में एक के बाद एक श्रीराम मंदिर बनाए जाएंगे । उन्होंने तारिक रहमान सरकार पर कट्टरपंथियों के प्रति नरम व्यवहार अपनाने का आरोप लगाते हुए अप्रसन्नता व्यक्त की । उनका कहना था कि सरकार के इस नरम रवैये के कारण हिन्दुओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ रही हैं । उन्होंने सरकार से हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की । |
क्या है प्रकरण ?
गाइबांधा के पलाशबाडी में ८१ फुट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा सहित एक श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था । स्थानीय हिन्दू इस प्रतिमा को अपनी ही भूमि पर मंदिर बनाकर उसमें स्थापित कर रहे थे । इसके विरोध में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने अभियान आरंभ किया । कट्टरपंथियों की एक भीड ने मंदिर के बाहर अत्यधिक नारेबाजी की तथा निर्माणाधीन श्रीराम प्रतिमा पर जूते फेंके । हिन्दू समुदाय ने इस प्रकरण में पुलिस में परिवाद पंजीकृत किया; परंतु अभी तक किसी भी आरोपी को बंदी बनहीं बनाया गया है । इससे हिन्दुओं में आक्रोश बढ रहा है । आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर हिन्दू समाज विभिन्न स्थानों पर रैलियां एवं प्रदर्शन कर रहा है ।
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