मंत्रजाप लिखे वस्त्र पहनने के लिए संत प्रेमानंद महाराज द्वारा विरोध !

वृंदावन (उत्तरप्रदेश) – यहां के संत प्रेमानंद महाराज ने पवित्र हिन्दू मंत्र लिखे वस्त्र पहनने के लिए विरोध दर्शाया है । हिन्दू धर्मग्रंथ में दिए श्लोक तथा मंत्र लिखे वस्त्र हाट में मिल रहे हैं । इस पृष्ठभूमि पर उन्होंने यह वक्तव्य किया । उन्होंने कहा है कि ‘मंत्रों का ऐसा उपयोग उचित नहीं तथा उसे रोकना चाहिए । वे वैदिक मंत्र हैं । उन्हें हृदय में रेखित करना चाहिए ’।
पवित्र शब्दाें का उपयोग ‘फैशन’ के रूपमें नहीं होना चाहिए !
अभी-अभी ही प्रेमानंद महाराज एक भक्त से मिले जिसने शिव मंत्र लिखा कुर्ता परिधान किया था। वह देख कर महाराज ने कहा कि वैदिक मंत्र भक्ति के साथ जपे जाते हैं तथा अंत:करण में कोरे जाते हैं । वस्त्रों पर प्रदर्शित नहीं किए जाते । मेरी विनती है कि इस प्रकार के वस्त्र परिधान न करें । ऐसा करना अनुचित हैै क्योंकि उन पर मंत्र लिखे होते हैं । कलियुग के लोगों ने ऐसा करना आरंभ किया है; परंतु यह अनुचित है । ये वैदिक मंत्र हैं । गुरु द्वारा ये मंत्र लेकर उनका मन में जाप करना चाहिए । इसलिए ऐसे वस्त्र न क्रय करें , न धारण करें । पवित्र शब्दों का उपयोग ‘फैशन’के रूप में नहीं होना चाहिए ।
साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !
‘जहां जाऊं मैं, वहां गुरुदेवजी आप ही हैं !’
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