भीलवाडा (राजस्थान) में छह दिवसीय ‘सनातन संस्कार प्रशिक्षण वर्ग’ का भव्य समापन !

उपस्थित शिविरार्थी

भीलवाडा (राजस्थान) – भावी पीढी को सुसंस्कृत और राष्ट्रभक्त बनाने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद (विवेकानंद शाखा), श्री काशीपुरी वकील कॉलोनी महेश समिति तथा सनातन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय ‘सनातन संस्कार प्रशिक्षण वर्ग’ का भव्य समापन हुआ । शिविर में कुल ५५ बच्चों ने सनातन धर्म की शिक्षा और अध्यात्म के व्यावहारिक सूत्रों को सीखा ।

समापन समारोह का प्रारंभ श्री. गोविंद प्रसाद सोडाणी के वैदिक शंखनाद से हुआ । शिविर संयोजक श्री. बालकिशन पारीक ने रूपरेखा रखी और सचिव श्री. के.जी. सोनी ने छह दिनों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेविका समिति की विभाग पालक संचालिका श्रीमती सुशीला जाट, संस्कार गतिविधि के प्रांतीय संयोजक श्री. अरुण बाहेती, विवेकानंद केंद्र की प्रांत संचालिका श्रीमती शकुंतला डाड, गायत्री परिवार की श्रीमती सरोजना व्यास, डॉ. उत्कृष्ट मांडोत, हिन्दू जनजागृति समिति के मध्य प्रदेश एवं राजस्थान समन्वयक श्री. आनंद जाखोटिया और वीर रस कवि श्री. योगेन्द्र शर्मा अतिथि के रूप में उपस्थित थे । अंत में शाखा अध्यक्ष श्री. गिरीश अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया । इस समय श्री. आनंद जाखोटिया ने बताया कि वर्तमान प्रतियोगिता के युग में बौद्धिक विकास के साथ बच्चों का आध्यात्मिक विकास आवश्यक है । भले ही पहले की भांति गुरुकुल व्यवस्था आज नहीं है, पर हर संभव प्रयासों के द्वारा बच्चों तक अध्यात्म को पहुंचाना होगा ।

नमस्कार का विज्ञान और बच्चों की प्रस्तुतियां

शिविर में बच्चों को सनातन संस्था द्वारा किए गए वैज्ञानिक शोधों की जानकारी दी गई, जिसमें मंदिर के गर्भगृह की संरचना, वहां की सकारात्मक ऊर्जा तथा देवताओं को नमस्कार करने की योग्य पद्धति का शास्त्र समझाया गया । समापन सत्र में बच्चों ने सूर्य नमस्कार, गणेश वंदना, ‘मंदिर दर्शन विज्ञान’, ‘जन्मदिन मनाने की भारतीय विधि’, ‘वास्तु शुद्धि’ और ‘तिलक धारण विज्ञान’ पर अत्यंत ज्ञानवर्धक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया ।

शिविर में बच्चों को सदा सत्य बोलने, सदाचरण अपनाने तथा जंक फुड का त्याग कर सात्त्विक आहार ग्रहण करने का प्रबोधन भी किया गया ।

ग्रंथ, सात्त्विक उत्पाद एवं वीर योद्धाओं की प्रदर्शनी

शिविर स्थल पर सनातन संस्था के अनमोल ग्रंथों, सात्त्विक उत्पादों तथा धर्मशिक्षा देनेवाले फ्लेक्स की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई । इसके साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल और वीर तेजाजी जैसे राष्ट्रनायकों की चित्र प्रदर्शनी तथा गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण का सेल्फी पॉइंट बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहे । इस वर्ग में सनातन संस्था की श्रीमती कल्पना काबरा, कु. अदिति काबरा, श्रीमती राखी मोदी, श्री. दीपक लड्ढा तथा कोटा के श्री. विष्णुकांत शर्मा ने बच्चों का मार्गदर्शन किया ।

दीपप्रज्वलन के लिए प्रयुक्त दीपस्तंभ में घी की अपेक्षा तेल डालना अधिक योग्य क्यों है ?

दीपप्रज्वलन के लिए प्रयुक्त दीपस्तंभ में तेल का प्रयोग करें । तेल रजोगुणी तरंगों के तथा घी सात्त्विक तरंगों के प्रक्षेपण का प्रतीक है । किसी भी कार्य को गति प्रदान करने हेतु रजोगुणी क्रियातरंगें आवश्यक होती हैं । तेल की ज्योति ब्रह्मांड में विद्यमान देवताओं की क्रियातरंगों को जागृत कर उन्हें कार्यरत रखती है; इसलिए दीपप्रज्वलन हेतु प्रयुक्त दीपस्तंभ में तेल का प्रयोग श्रेयस्कर है ।