POK Protests : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) पाकिस्तान का भाग नहीं है और यदि दमन बंद नहीं हुआ, तो हम भारत के साथ चले जाएंगे !

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आंदोलनकारियों की पाकिस्तान को चेतावनी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर मे आंदोलन

रावलकोट (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) – पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान का नहीं है । हमें पाकिस्तान की आवश्यकता नहीं है, अपितु पाकिस्तान को अपने अस्तित्व के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की आवश्यकता है । यदि वर्तमान स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो स्थानीय लोग भारत के साथ चले जाएंगे । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सीमाएं खोली जा सकती हैं और यदि ऐसा हुआ, तो पाकिस्तान को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों को रोकने के लिए भीख मांगनी पडेगी, ऐसी चेतावनी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नागरिक विद्रोह का नेतृत्व कर रहे नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सरदार अमन खान ने ईदगाह मैदान में एकत्रित जनसमुदाय के समक्ष दी । पाकिस्तान के प्रशासनिक दमन के विरोध में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट स्थित ईदगाह मैदान में सहस्रों लोग २२ दिनों से आंदोलन कर रहे हैं । महंगाई, आर्थिक संकट, जीवनावश्यक खाद्य पदार्थों और राशन की आपूर्ति पर प्रतिबंध तथा प्रशासनिक विफलता से क्रोधित नागरिक यह आंदोलन कर रहे हैं ।

स्वतंत्रता प्राप्त होने तक नागरिक विद्रोह नहीं रुकेगा !

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अनेक दशकों से चली आ रही राजनीतिक दमन, महंगाई और प्रशासनिक उपेक्षा के विरोध में ३८ सूत्रीय मांगों को लेकर नागरिक विद्रोह आरंभ हुआ है । वे पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं । यहां के आंदोलन की जानकारी विश्व के समक्ष न आए, इसके लिए पाकिस्तानी सरकार ने ५ जून से इस क्षेत्र में इंटरनेट सेवा बंद कर दी है । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के प्रवासी लोग इस विद्रोह के समर्थन में विभिन्न देशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावासों और उच्चायोगों के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं । दूसरी ओर आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि मुजफ्फराबाद सहित सभी क्षेत्रों को पाकिस्तानी नियंत्रण से स्वतंत्रता मिलने तक यह विद्रोह नहीं रुकेगा ।

विरोधी नेताओं को जाने से रोका !

पाकिस्तानी सरकार ने विरोधी नेताओं के नेतृत्ववाले प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जाने से रोक दिया । जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी ने इसके लिए पाकिस्तानी अधिकारियों की कडी आलोचना की है । उनका कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक मतभेदों को दबाने की कार्रवाई का एक और प्रमाण है ।

संपादकीय भूमिका

यदि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुसलमान भारत में आए, तो क्या वे भारत और हिन्दुओं के प्रति ईमानदार रहेंगे ? क्या वे भारत की प्रगति में योगदान देंगे अथवा वे भी विभिन्न प्रकार के जिहाद में सम्मिलित होंगे ? इस पर भी विचार करना आवश्यक है !