सनातन धर्म के लिए कार्य करनेवालों को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होने हेतु महोत्सव में महाधन्वंतरि याग संपन्न !

महाधन्वंतरि याग के समय पूजन करते हुए (१)गुरुमूर्ति शिवाचार्य, याग में उपस्थित अन्य पुरोहितगण, (२) श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी, (३) सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एवं (४) श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले नगरी, फोंडा, गोवा : आनेवाले भीषण काल में सभी साधकों के स्वास्थ्य की रक्षा हो तथा सनातन राष्ट्र की स्थापना शीघ्रता से हो; इसके लिए सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में महाधन्वंतरि याग संपन्न किया गया । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की दिव्य उपस्थिति में संपन्न इस याग का देश-विदेशों से आए सहस्रों साधकों तथा धर्मप्रेमियों ने लाभ उठाया ।

महाधन्वंतरि यज्ञ के आरंभ में शंखनाद किया गया । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी के करकमलों से दीपप्रज्वलन कर याग का आरंभ हुआ । सामूहिक रूप से श्री गणेशजी का श्लोक बोला गया । उसके उपरांत पुण्याहवाचन, महागणपति पूजन एवं नवग्रह पूजन कर श्रीविष्णुसहस्रनाम का पाठ किया गया । इस यज्ञ के यजमानपद का निर्वहन सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी तथा उनकी उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने किया । ६४ दंपति ने इस यज्ञ का संकल्प लिया । यज्ञ के आरंभ में महासंकल्प लिया गया । इस अवसर पर सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के लिए एकत्रित २५ सहस्र साधकों तथा हिन्दुत्वनिष्ठों ने महासंकल्प किया । इस यज्ञ में तीर्थरूप डॉ. (श्रीमती) कुंदा जयंत आठवलेजी की भी वंदनीय उपस्थिति थी ।

  • अष्टदल कमल के आकारवाले वृत्ताकार यज्ञकुण्ड में इस महाधन्वंतरि देवता के प्रति विभिन्न आयुर्वेदीय वनस्पतियों का हवन किया गया । यह आहुति श्री महाधन्वंतरि देवता तक पहुंचे; इसके लिए प्रार्थना की गई । महापूर्णाहुति से इस याग का समापन हुआ ।
  • ईरोड, तमिलनाडु के गुरुमूर्ति शिवाचार्य एवं शिवागम विद्यानिधि आगमाचार्य श्री. अरुण कुमार गुरुमूर्ति ने इस याग का पौरोहित्य किया ।