Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं 

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश में हिन्दुओं तथा अन्य अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हो रही हिंसा को लेकर ‘ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज’ ने एक राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रसारित की है । इसमें वर्ष २०२६ के पहले ४ महीनों (जनवरी से अप्रैल) के मध्य अल्पसंख्यकों के विरुद्ध उत्पीडन तथा हिंसा की ५०५ दर्दनाक घटनाओं का उल्लेख किया गया है । ४७ अलग-अलग जिलों में १०० हिन्दुओं की हत्या एवं संदिग्ध मौतों की घटनाएं सामने आई हैं । इसके अतिरिक्त, अपहरण तथा क्रूर मारपीट की १४४ घटनाएं ४९ जिलों में पंजीकृत की गई हैं । इनमें २८ बलात्कार की घटनाएं भी समाहित हैं तथा ९५ मंदिरों में तोडफोड की गई है । यह आंकडे केवल उन्हीं प्रकरणों के हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई है । वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि भय तथा सामाजिक दबाव के कारण अनेक लोग पुलिस में परिवाद प्रविष्ट नहीं कराते ।

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन होने के उपरांत भी हिन्दुओं तथा अन्य निर्बल समुदायों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है तथा उनके साथ लगातार हिंसक आक्रमणों, हत्याओं एवं लूटपाट की घटनाएं हो रही हैं । यह रिपोर्ट बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति का एक बडा तथा ठोस प्रमाण माना जा रहा है ।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु –

पूरे बांग्लादेश में फैला है घृणा का जाल 

संस्था ने कहा कि अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हुई ५०५ घटनाएं किसी एक छोटे क्षेत्र या शहर तक सीमित नहीं हैं । यह एक सुनियोजित षडयंत्र तथा देशभर में फैलाए गए घृणा अभियान का परिणाम है । यह हिंसा बांग्लादेश के सभी ८ प्रशासनिक विभागों के ६४ जिलों में से ६२ जिलों तक फैल चुकी है । अर्थात देश का कदाचित ही कोई ऐसा हिस्सा बचा हो, जहां अल्पसंख्यक समुदाय स्वयं को सुरक्षित अनुभव कर सके । इसमें ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर बडे शहरों तक के क्षेत्र सम्मिलित हैं, जहां हिन्दू परिवार हर क्षण भय के साये में जी रहे हैं ।

महिलाओं पर अत्याचार तथा भूमि पर अवैध रूप से अधिकार करना 

अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं तथा लडकियों को इस हिंसा में सबसे अधिक लक्ष्य बनाया जा रहा है । रिपोर्ट में महिलाओं पर लैंगिक हिंसा, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की २८ भयावह घटनाओं का उल्लेख है, जो २३ अलग-अलग जिलों में हुई हैं । हिन्दू तथा स्वदेशी (आदिवासी) समुदायों की संपत्तियों को हानि पहुंचाने, उनकी पैतृक भूमि पर बलपूर्वक अधिकार करने, घरों में आग लगाने तथा लूटपाट की १३२ बडी घटनाएं सामने आई हैं । आर्थिक रूप से निर्बल अल्पसंख्यक परिवारों को धन तथा बल के आधार पर बेघर किया जा रहा है, ताकि उन्हें देश छोडने पर विवश किया जा सके ।

९५ मंदिरों पर आक्रमण तथा ईशनिंदा के झूठे आरोप

 (ईशनिंदा – ईश्वर या धर्म के प्रति असम्मान )

बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता पूरी तरह संकट में दिखाई दे रही है । केवल ४ महीनों में हिन्दू मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों पर आक्रमणों तथा तोडफोड की ९५ घटनाएं पंजीकृत की गई हैं । भीड खुलेआम मंदिरों को लक्ष्य बना रही है पवित्र मूर्तियों का अपमान कर रही है । इसके अतिरिक्त, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को फंसाने के लिए ‘ईशनिंदा’ के आरोपों का दुरुपयोग किया जा रहा है । कुल ६ ऐसे प्रकरण पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें लोगों पर झूठे आरोप लगाकर भीड को भडकाया गया तथा उनके विरुद्ध हिंसा की गई ।

सरकार बदली, परंतु हिन्दुओं का दुःख नहीं बदला 

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पडा है । वर्ष २०२५ में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्ववाली अंतरिम सरकार के १८ महीने के कार्यकाल में भी हिन्दुओं पर भयानक अत्याचार हुए थे, जिसने पूरे विश्व को झकझोर दिया था । उस समय हिन्दुओं के विरुद्ध लगभग साढे तीन सहस्र आक्रमण तथा अत्याचार की घटनाएं हुई थीं । इसके उपरांत फरवरी २०२६ में जब नई निर्वाचित सरकार सत्ता में आई, तब स्थिति सुधरने की आशा थी, परंतु ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ सरकार के दौरान भी हिंसा उसी गति से जारी है । इससे स्पष्ट होता है कि यह संकट केवल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं, अपितु वहां की पूरी व्यवस्था की विफलता का संकेत है ।

प्रशासन की चुप्पी तथा कानून व्यवस्था की विफलता 

रिपोर्ट में बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था तथा पुलिस प्रशासन पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं । पीडित परिवारों का आरोप है कि जब भी उन पर आक्रमण होता है, पुलिस या तो बहुत देर से पहुंचती है या प्रकरण की जांच को निर्बल कर देती है । अपराधियों को दंड न मिलने से उनके हौसले बढते जा रहे हैं । पीडितों तथा साक्षियों को धमकाया जाता है, ताकि वे न्यायालय का दरवाजा न खटखटाएं । इस संस्थागत विफलता के कारण अल्पसंख्यक समुदाय पूरी तरह टूट चुका है तथा भारी मानसिक तनाव में जीवन जी रहा है ।

अन्य संगठनों की रिपोर्टें भी दे रही हैं प्रमाण ।

‘ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज’ के अतिरिक्त बांग्लादेश की अन्य मानवाधिकार संस्थाओं ने भी इन दावों की पुष्टि की है । इससे पहले ‘बांग्लादेश हिन्दू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद’ ने भी एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जनवरी से मार्च के बीच धार्मिक उत्पीडन की १३३ घटनाओं का उल्लेख किया गया था । उस रिपोर्ट में २५ हत्याएं, महिलाओं पर अत्याचार तथा ३५ मंदिरों में लूटपाट की जानकारी दी गई थी ।

इन सभी रिपोर्टों का निष्कर्ष यही है कि यदि बांग्लादेश सरकार ने तुरंत कठोर कदम नहीं उठाए तथा दोषियों को दंडित नहीं किया, तो आनेवाले समय में वहां अल्पसंख्यक समुदायों का अस्तित्व बनाए रखना अत्यंत कठिन हो जाएगा ।

रिपोर्ट यहा पढे :

संपादकीय भूमिका

  • बांग्लादेश में कोई भी सरकार हो, वहां के हिन्दुओं का नरसंहार नहीं रुकेगा, क्योंकि मुसलमान ‘मुसलमान’ ही होते हैं । वे किसी भी दल में हों, उनके भीतर का हिन्दू-द्वेष समाप्त नहीं हो सकता 
  • इस संदर्भ में हिन्दूबहुल भारत, भारत की हिन्दू संस्थाएं तथा १०० करोड हिन्दुओं का निष्क्रिय रहना हिंदुओं लिए लज्जाजनक है