समर्पित जीवन जीनेवाली और परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति उत्कट भाव से युक्त बेळगांव की श्रीमती विजया दीक्षित बनीं सनातन की ११३ वीं व्यष्टि संत !

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी ने पू. दीक्षितजी को पुष्पहार पहनाकर और भेंटवस्तु देकर उनका सम्मान किया, साथ ही जन्मदिन के निमित्त उनकी आरती भी उतारी ।

लगन से सेवा कर श्री गुरु का मन जीतनेवाली कु. दीपाली मतकर (आयु ३३ वर्ष) सनातन के ११२ वें समष्टि संतपद पर विराजमान !

समष्टि साधना की तीव्र लगन, साधकों की आध्यात्मिक प्रगति की लगन रख निरंतर साधना में उनकी मां समान सहायता करना एवं श्रीकृष्ण के प्रति गोपीभाव आदि गुण कु. दीपाली मतकर में हैं ।

सहनशील, सेवा की लगन एवं सनातन संस्था के प्रति श्रद्धाभाव रखनेवाले ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त जोधपुर (राजस्थान) निवासी दिवंगत बंकटलाल मोदी (वय ७५ वर्ष) !

‘पति का नामजप और त्याग होना, बीमारीरूपी प्रारब्ध सहन करने की शक्ति मिलना और अंततः सहजता से प्राण छोडना’, यह सबकुछ गुरुकृपा से ही संभव हुआ ।

पुणे की श्रीमती उषा कुलकर्णी (आयु ७९ वर्ष) सनातन की ११० वीं तथा श्री. गजानन साठे (आयु ७८ वर्ष) १११ वें संत घोषित !

वृद्ध होते हुए भी अकेले ही रोग में सभी स्थिति संभालनेवाली, जिनका अखंड भाव रहता है कि ‘गुरुदेव साथ में हैं’ एवं स्थिरता जिनका स्थायीभाव है, ऐसी श्रीमती उषा कुलकर्णीजी को सनातन की ११० वीं व्यष्टि संत घोषित किया गया ।

सनातन के संत पू. (श्रीमती) सुशीला मोदीजी एवं पू. नीलेश सिंगबाळजी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !

भाद्रपद पूर्णिमा (२० सितंबर) को वाराणसी के पू. नीलेश सिंगबाळजी का जन्मदिन है । इस निमित्त से ‘झारखंड राज्य के धनबाद और कतरास जिलों के साधकों को पू. नीलेश सिंगबाळजी से सिखने को मिले सूत्र इस लेख में प्रस्तुत हैं ।

गुरुदेवजी पर अपार श्रद्धा रखनेवाली डॉ. (श्रीमती) शरदिनी कोरे (आयु ७८ वर्ष) १०९ वें संतपद पर विराजमान !

सनातन के इतिहास में एक ही समय मां के संत और पुत्री के जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होने की अभूतपूर्व घटना !

परात्पर गुरुदेवजी के प्रति कृतज्ञभाव में रहनेवालीं जयपुर (राजस्थान) निवासी सनातन की संत पू. गीतादेवी खेमकाजी

सनातन की ८३ वीं संत पू. गीतादेवी खेमकाजी का ७९ वां जन्मदिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी (२८.८.२०२१) को है । इस अवसर पर उनकी बेटी और पोते को ध्यान में आई पू. खेमकाजी की गुणविशेषताएं आगे दी हैं ।

सनातन के ४७ वें संत पू. रघुनाथ राणेजी (आयु ८२ वर्ष) का ठाणे में देहत्याग !

मूलतः सिंधुदुर्ग जिले में स्थित ओझरम गांव के निवासी तथा वर्तमान में ठाणे में वास्तव्य करनेवाले सनातन के ४७ वें संत पू. रघुनाथ वामन राणेजी (पू. राणेजी) (आयु ८२ वर्ष) ने ११ जुलाई २०२१ को उत्तररात्रि २ बजे ठाणे के रुग्णालय में देहत्याग किया ।

विनम्रता एवं दास्यभाव के मूर्तिमंत प्रतीक हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी !

‘एक बार हम गोवा से पुणे की यात्रा कर रहे थे । उस समय सद्गुरु पिंगळेजी मेरे बगल में बैठे थे । सद्गुरु पिंगळेजी के प्रभाव से ‘स्टेयरिंग’ पर हाथ होने के समय मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ‘मैंने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के चरण पकडे हुए हैं ।’

सनातन के ४६ वें संत पू. भगवंत मेनरायजी की सेवा में रहते समय साधकों को सीखने मिले सूत्र एवं प्राप्त अनुभूतियां !

वर्ष २०१९ में पू. मेनरायजी जब रामनाथी आश्रम में थे, तब मुझे ‘उनके वस्त्र धोने और इस्तरी करने’ की सेवा मिली थी । तब पू. (श्रीमती) मेनरायजी एवं पू. मेनरायजी दोनों ही बीमार थे । उन्हें अधिकांश समय विश्राम ही करना पडता था ।