राहुल गांधी ने वर्ष २०२० से ११३ बार किया सुरक्षा नियमों का उल्लंघन !
इस प्रकार नियमों का उल्लंघन करने के उपरांत अनुचित घटना होती है, तो इसके लिए कौन उत्तरदायी होगा, यह कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए !
इस प्रकार नियमों का उल्लंघन करने के उपरांत अनुचित घटना होती है, तो इसके लिए कौन उत्तरदायी होगा, यह कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए !
राहुल गांधी का महिमामंडन करने के लिए सलमान खुर्शीद को हिन्दू देवताओं काआश्रय क्यों लेना पड़ा ? वे राहुल गांधी की तुलना अपने ही संप्रदाय के धार्मिकश्रद्धास्थानों से क्यों नहीं करते ? बहुधा वे ऐसा करने से बचते हैं क्योंकि वे अच्छी तरह जानते हैं कियदि उन्होंने ऐसा किया तो उनका क्या होगा ?’
‘कुंभमेले के अवसर पर निरपेक्षतावादियों ने ‘कुंभमेले में कोरोना का संक्रमण बढा’, ऐसी टिप्पणी करते हुए यह उत्सव बंद करने की मांग की थी । अब पुन: कोरोना का संकट उभरा, तो निरपेक्षतावादी ‘भारत जोडो यात्रा’ बंद करने की मांग क्यों नहीं करते ?
स्वास्थ्यमंत्री की विनती पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि, भारत जोडो यात्रा से मोदी सरकार डर गई है । लोगों का ध्यान दूसरी ओर करने के लिए भाजपा विविध प्रश्न उठा रही है ।
मध्यप्रदेश के इंदौर में मिठाई की दुकान में (दुकान) मिला धमकी भरा पत्र !
२४ वर्षों उपरांत गांधी परिवार से बाहर का व्यक्ति अध्यक्ष कांग्रेस का मिला है । इसके पूर्व सीताराम केसरी वर्ष १९९६ से १९९८ तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे । इसके उपरांत सोनिया गांधी ने अध्यक्षपद का दायित्व स्वीकार किया था ।
यों प्रभु श्रीराम को काल्पनिक पात्र कहनेवाले हिन्दूद्रोही कांग्रेस का कपटी एवं दोहरी नीतिवाला मुखौटा कैसा है, यह ध्यान में रखें ! ऐसी कांग्रेस को इतिहास बनाने हेतु हिन्दू सिद्ध हैं, कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए !
गांधी और नेहरू परिवार ने हमेशा ही क्रांतिकारियों का अपमान किया है । इस कारण राहुल गांधी का इस कार्यक्रम के लिए अनुपस्थित रहना, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं ! कांग्रेस को क्षमा मांगने की अपेक्षा प्रायश्चित के रुप में क्रांतिकारियों का सम्मान करने का प्रयास करना चाहिए !
दो दल अथवा संघटना में मतभेद हो सकते हैं, परंतु कांग्रेस कितनी निचले स्तर पर जाकर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों से द्वेष करती है, यह स्पष्ट हो रहा है । ऐसा पक्ष जनहित क्या साधेगा ?
राहुल गांधी को ‘यह विधान मान्य है अथवा नहीं’, उन्हें यह सार्वजनिक (जाहिर) रूप से भारतीयों को बताना चाहिए, अन्यथा उन्हें यह विधान मान्य है, ऐसा ही समझा जाएगा !