सप्तर्षि द्वारा वर्ष २०२१ की गुरुपूर्णिमा के गुरुपूजन हेतु निर्मित चित्र की विशेषताएं
उपरोक्त चित्र के ऊपरी भाग, मध्यभाग एवं निचले भाग को स्पर्श कर क्या अनुभव होता है ?, इसकी अनुभूति लें ।
उपरोक्त चित्र के ऊपरी भाग, मध्यभाग एवं निचले भाग को स्पर्श कर क्या अनुभव होता है ?, इसकी अनुभूति लें ।
वर्ष २०२१ की गुरुपूर्णिमा में सप्तर्षियों के बताए अनुसार चित्र बनाकर उसका पूजन रामनाथी आश्रम में किया गया । उस चित्र की ओर देखकर मुझे हुई अनुभूति इस लेख में दी है ।
कुलार्णवतन्त्र, उल्लास १४, श्लोक ३७ के अनुसार मादा कछुआ केवल मन में चिंतन कर भूमि के नीचे रखें अंडों को उष्मा देती है, बच्चों को बडा करती है और उनका पोषण करती है, उसी प्रकार गुरु केवल संकल्प द्वारा शिष्य की शक्ति जागृत करते हैं तथा उसमें शक्ति का संचार करते हैं ।
वर्तमान आपातकाल में साधक अनेक स्तरों पर संघर्ष कर रहे हैं । कोई पारिवारिक, कोई सामाजिक, कोई आर्थिक, कोई शारीरिक, कोई मानसिक, तो कोई बौद्धिक संघर्ष कर रहा है !
‘विज्ञान माया संबंधी विषयों में शोध करता है; जबकि अध्यात्म में ईश्वर, ब्रह्म इत्यादि के विषय में शोध किया जाता है ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
‘धर्मरक्षा करने पर स्वयं की रक्षा होती है, यह ध्यान में रखें ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार
जैसे जो डॉक्टर ना हो वह रोगी पर उपाय करे; उसी प्रकार राष्ट्र और धर्म के प्रति प्रेम रहित जनता को, राष्ट्र और धर्म के प्रति प्रेम रहित राजनीतिक दलों को चुनने का अधिकार देने के कारण सभी क्षेत्रों में देश की दयनीय स्थिति हो गई है !’ – (परात्पर गुरु) डॉक्टर आठवले
‘कहां एक गाय की रक्षा के लिए प्राण त्यागनेवाले हिन्दुओं के पूर्वज, और कहां लाखों गायों को पशुवधगृह में भेजनेवाले आज के हिन्दू !’ – (परात्पर गुरु) डॉ. अठावले