काल की आवश्यकता समझकर राष्ट्र तथा धर्मरक्षा की शिक्षा देना, यह गुरु का वर्तमान कर्तव्य !

राष्ट्र तथा धर्मरक्षा की शिक्षा देनेवाले गुरुओं के कार्य का स्मरण कीजिए !

कलियुग की सर्वश्रेष्ठ साधना कौनसी है ?

नामजप ही कलियुग की सर्वश्रेष्ठ साधना है । वर्तमान में कलियुगांतर्गत कलियुग में गुरुकृपायोगानुसार साधना ही शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति करानेवाली साधना है ।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुरेव परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः

शिष्य का अज्ञान दूर हो तथा उसकी आध्यात्मिक उन्नति हो, इसलिए जो उससे उपयुक्त साधना करवा लेते हैं और इस प्रकार सहजता से वास्तविक अनुभूति प्रदान करा देते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं । शिष्य का परममंगल अर्थात मोक्षप्राप्ति केवल गुरुकृपा से ही हो सकती है ।

अर्पणदाताओ, गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में धर्मकार्य हेतु धन अर्पित कर गुरुतत्त्व का लाभ लो !

गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में तन, मन एवं धन का अधिकाधिक त्याग कर गुरुदेवजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर सभी को प्राप्त हुआ है । अतः जिज्ञासु एवं शुभचिंतक धर्मप्रसार का कार्य कर तथा उसके लिए धन अर्पित कर गुरुपूर्णिमा का आध्यात्मिक स्तर पर लाभ लें ।

गुरुपूर्णिमा के शुभ दिन पर लोकार्पण हुए सनातन के ग्रंथ एवं प्रथम ‘ई-बुक’ !

सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सवों में सनातन के संतों के करकमलों द्वारा ‘व्यष्टि एवं समष्टि साधना, आध्यात्मिक कष्ट एवं आपातकाल के विषय में उपाय’ इन विषयों पर आधारित हिन्दी, कन्नड और अंग्रेजी भाषा के ग्रंथों का लोकार्पण किया गया ।

जो साधना के रूप में लेखन करते हैं, उनसे ही गुरु लेखन-कार्य करवाते हैं ! – वैज्ञानिक एवं लेखक डॉ. मोहन बांडे

प्रत्येक साधक के जीवन में गुरु विविध माध्यम से आते हैं । सभी संत भले ही अलग-अलग दिखाई दें, तब भी वे अंदर से एक ही होते हैं । किससे कौनसी साधना करवानी है, यह उन्हें पता होता है ।

कांदळी (पुणे) में प.पू. भक्तराज महाराजजी के समाधिस्थल पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !

सनातन संस्था के श्रद्धाकेंद्र प.पू. भक्तराज महाराजजी के कांदळी के समाधिस्थल पर २३ जुलाई को कोरोना के सर्व नियमों का पालन कर गुरुपूर्णिमा महोत्सव भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया ।

गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में अधिकाधिक सेवा कर हम गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं ! – पू. नीलेश सिंगबाळजी, धर्मप्रचारक, हिन्दू जनजागृति समिति

‘गुरुपूर्णिमा शिष्यों एवं साधकों के जीवन का सबसे बडा उत्सव है । इस उपलक्ष्य में हम तन, मन एवं धन का त्याग और गुरुसेवा कर गुरुदेवजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं ।

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर हिन्दू-राष्ट्र स्थापना हेतु सक्रिय होने का निश्‍चय करें ! – सद्गुरु डॉ. पिंगळे

शिष्य की आध्यात्मिक उन्नति के साथ धर्मसंस्थापना करना, यह गुरु परंपरा का कार्य रहा है । वर्तमान समय में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना, यह धर्मसंस्थापना का ही कार्य है ।