कब्रें १०० वर्षों से भी अधिक समय से अस्तित्व में हैं; केवल इसलिए वे ‘संरक्षित स्मारक’ नहीं हो सकतीं ! – मद्रास उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय ने कुछ समय पूर्व ही दिए एक आदेश में कहा है कि १०० वर्षों से भी अधिक समय से कब्रें हैं; केवल इसलिए वे ‘प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम,१९५८’ कानून के अंतर्गत ‘संरक्षित स्मारक’ के रूप में घोषित करने का कारण नहीं हो सकता ।