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अनेकों प्रकरणों में हिन्दुओं को बंदी बनाया जाता है और प्रताडित भी किया जाता है, जो बाद में न्यायालयद्वारा निर्दोष मुक्त कर दिए जाते हैं। ऐसे कितने लोगों को मानवाधिकार आयोग या संबंधित राज्य सरकारोंद्वारा नुकसान भरपाई दी गई है ? जबकि, कट्टरपंथियों को तुरंत नुकसान भरपाई दी जाती है ; क्या यह भेदभाव नहीं है ?

मदुरै (तमिलनाडु) – तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग ने मदुरै के आर.एस.एस. कार्यालय में एक गाय का सिर काट कर फेकने के प्रकरण में, बंदी बनाए गए चार मुसलमान युवकों को एक-एक लाख रुपये की नुकसान भरपाई देने का आदेश दिया है। यह घटना २०११ की है। आरोपियों को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडियाद्वारा कानूनी सहायता प्रदान की गई थी।
RSS ऑफिस में गाय का सिर फेंकने के आरोपित 4 मुस्लिम, मानवाधिकार आयोग ने कहा- सबको ₹1-1 लाख दें#TamilNadu https://t.co/OpMuXd7CGM
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) December 7, 2021
१. आयोग ने कहा, कि मदुरै पुलिस ने अवैधानिक रूप से युवकों को अभियुक्त बनाया और उन्हें प्रताडित किया। स्वयं को निरपराध सिद्ध करने का प्रयत्न करने पर भी युवकों को प्रताडित किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि, प्रकरण की विवेचना करनेवाले पुलिस के विरोध में भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
२. प्रकरण की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपने प्रतिवेदन में कहा है, कि आरोपियों को प्रताडित किया गया। आयोग ने अपने आदेश में प्रतिवेदन का संदर्भ दिया है।
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