उबटन लगाने की उचित पद्धति क्या है ?

उबटन रजोगुणी एवं तेजतत्त्व से संबंधित है, इसलिए उसे शरीर पर लगाते समय दक्षिणावर्त अर्थात घडी की सुइयों की दिशा में हाथों की उंगलियों के अग्रभाग का शरीर से स्पर्श करते हुए थोडा दबाव देकर लगाएं । प्रत्येक स्थान पर उबटन लगाने की पद्धति वहां की रिक्ति की कष्टदायक वायु की गति अनुसार दी है ।

भैयादूज (यमद्वितीया)

अपमृत्यु टालने हेतु धनत्रयोदशी, नरक चतुर्दशी एवं यमद्वितीया के दिन मृत्यु के देवता, ‘यमधर्म’ का पूजन करते हैं । भैयादूज ‘दृक सिद्धांत’ के अनुसार २६ अक्टूबर २०२२ को मनाया जाएगा । ‘इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने जाते हैं एवं उस दिन नरक में सड रहे जीवों को वह उस दिन के लिए मुक्त करते हैं ।’

छठ पूजा (३० अक्टूबर)

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे सबसे बडा त्योहार मानते हैं । इसमें गंगा स्नान का महत्त्व सबसे अधिक है । यह व्रत स्त्री एवं पुरुष दोनों करते हैं । यह चार दिवसीय ….

विजयादशमी के दिन करने योग्य कृत्य एवं उसका अध्यात्मशास्त्र !

दशहरे को सरस्वती तत्त्व के क्रियात्मक पूजन से जीव के व्यक्त भाव का अव्यक्त भाव में रूपांतर होकर जीवको स्थिरता में प्रवेश होने में सहायता मिलती है ।

कोजागरी पूर्णिमा

कोजागरी पूर्णिमा की रात को लक्ष्मी तथा इंद्र की पूजा की जाती है । कोजागरी पूर्णिमा की कथा इस प्रकार है कि बीच रात्रि में लक्ष्मी पृथ्वी पर आकर जो जागृत है, उसे धन, अनाज तथा समृद्धि प्रदान करती है । श्रीमद्भागवत के कथनानुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजमंडल में रासोत्सव मनाया था ।

करवा चौथ

वास्तव में करवा चौथ का व्रत हिन्दू संस्कृति के उस पवित्र बंधन का प्रतीक है, जो पति-पत्नी के बीच होता है । हिन्दू संस्कृति में पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गई है । करवा चौथ पति एवं पत्नी दोनों के लिए नवप्रणय निवेदन तथा एक-दूसरे के लिए अपार प्रेम, त्याग एवं उत्साह की चेतना लेकर आता है ।

शारदीय नवरात्रि : धर्मशिक्षा

२६ सितंबर (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा) से ४ अक्टूबर (आश्विन शुक्ल नवमी) की अवधि में शारदीय नवरात्रोत्सव मनाया जाएगा । पूरे भारत में अत्यंत उत्साह एवं भक्तिमय वातावरण में नवरात्रि के व्रत का पालन किया जाता है ।

शक्तिदेवता !

इस वर्ष की नवरात्रि के उपलक्ष्य में हम देवी के इन ९ रूपों की महिमा समझ लेते हैं । यह व्रत आदिशक्ति की उपासना ही है !

श्री गणपति विसर्जन के संदर्भ में हमें यह जानकारी है कया ? 

पूजा के कारण मूर्ति में आया चैतन्य बहते पानी में मूर्ति का विसर्जन करने से पानी द्वारा दूर-दूर तक पहुंचता है । कुंड का पानी बहता हुआ न होने के कारण इन आध्यात्मिक लाभों से श्रद्धालु वंचित रहते हैं ।

श्री गणेशोपासना एवं उससे संबंधित महत्वपूर्ण सूत्र

श्री गणेशजी की उपासना में नित्यपूजा, अभिषेक, संबंधित व्रत एवं उपवास, अथर्वशीर्ष पाठ, संबंधित विविध श्लोक एवं मंत्रोंका विशिष्ट संख्या में पाठ, नामजप जैसे विविध कृत्यों का अंतर्भाव होता है ।