शारदीय नवरात्रि : धर्मशिक्षा

२६ सितंबर (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा) से ४ अक्टूबर (आश्विन शुक्ल नवमी) की अवधि में शारदीय नवरात्रोत्सव मनाया जाएगा । पूरे भारत में अत्यंत उत्साह एवं भक्तिमय वातावरण में नवरात्रि के व्रत का पालन किया जाता है ।

शक्तिदेवता !

इस वर्ष की नवरात्रि के उपलक्ष्य में हम देवी के इन ९ रूपों की महिमा समझ लेते हैं । यह व्रत आदिशक्ति की उपासना ही है !

श्री गणपति विसर्जन के संदर्भ में हमें यह जानकारी है कया ? 

पूजा के कारण मूर्ति में आया चैतन्य बहते पानी में मूर्ति का विसर्जन करने से पानी द्वारा दूर-दूर तक पहुंचता है । कुंड का पानी बहता हुआ न होने के कारण इन आध्यात्मिक लाभों से श्रद्धालु वंचित रहते हैं ।

श्री गणेशोपासना एवं उससे संबंधित महत्वपूर्ण सूत्र

श्री गणेशजी की उपासना में नित्यपूजा, अभिषेक, संबंधित व्रत एवं उपवास, अथर्वशीर्ष पाठ, संबंधित विविध श्लोक एवं मंत्रोंका विशिष्ट संख्या में पाठ, नामजप जैसे विविध कृत्यों का अंतर्भाव होता है ।

ऋषि पंचमी

‘जिन ऋषियों ने अपने तपोबल से विश्व-मानव पर अनंत उपकार किए हैं, मनुष्य के जीवन को उचित दिशा दी है, उन ऋषियों का इस दिन स्मरण किया जाता है ।’

ज्येष्ठा गौरी

असुरों द्वारा पीडित सभी स्त्रियां श्री महालक्ष्मी गौरी की शरण में गईं एवं उन्होंने अपने अक्षुण्ण सौभाग्य हेतु प्रार्थना की ।

शास्त्रानुसार गणेशोत्सव कैसे मनाएं ?

भगवान श्री गणेश सर्व हिंदुओंके आराध्य देवता हैं । इसके साथ ही भगवान गणेश बुद्धीके देवता भी हैं । गणपति सभीको आनंद देनेवाले देवता हैं ।

श्रीगणेश चतुर्थी व्रतविधि एवं श्री गणेशमूर्तिका आवाहन

गणेशोत्सवके लिए की जानेवाली सजावटमें विविध प्रकारके रंगबिरंगे एवं चमकीले कागज, थर्मोकोल, प्लास्टिक इत्यादिका उपयोग किया जाता है । साथही रंगबिरंगे प्रकाश देनेवाले बिजलीके बल्बकी मालाओंका भी उपयोग करते हैं । ये वस्तुएं कृत्रिम एवं रासायनिक पदार्थासे बनी होती हैं ।

श्री गणेशमूर्तिकी पूजाविधि

श्री गणेशचतुर्थीके दिन पूजन हेतु श्री गणेशजीकी नई मूर्ति लाई जाती है । पूजाघरमें रखी श्री गणेशमूर्तिके अतिरिक्त, इस मूर्तिका स्वतंत्र रूपसे पूजन किया जाता है ।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (गोकुलाष्टमी)

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्णतत्त्व प्रतिदिन की तुलना में १००० गुना अधिक कार्यरत होता है । इस तिथि पर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।’ नामजप तथा श्रीकृष्णजी की अन्य उपासना भावपूर्ण करने से श्रीकृष्णतत्त्व का अधिक लाभ मिलता है ।