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‘भारत के निर्धन होते हुए पटाखों के माध्यम से करोडों रुपए जलानेवाले देशद्रोही ही हैं ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
हिन्दुओं, पटाखों के दुष्परिणाम जानें !‘वर्तमान में गणेशोत्सव के निमित्त सभी ओर पटाखे अधिक मात्रा में फोडे जाते हैं । इन पटाखों के माध्यम से होनेवाला ध्वनिप्रदूषण, वायुप्रदूषण साथ साथ आध्यात्मिक स्तर पर होनेवाले नकारात्मक परिणाम देखें तो इससे हानि ही अधिक है । ऐसी परिस्थिति में विचार करना चाहिए कि, ‘गणपति को पटाखे फोडना अच्छा लगेगा अथवा उनका नामजप करना अधिक अच्छा लगेगा ?’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी |

१. गौरी विसर्जन के समय यदि श्री गणपति विसर्जन करना है, तो उस दिन कोई भी वार अथवा कितने भी दिन हुए होेंं, हम उस दिन विसर्जन कर सकते हैं ।
२. घर में गर्भवती महिला हो तो भी श्री गणपति विसर्जन कर सकते हैं । ऐसे समय पर विसर्जन नहीं करना चाहिए यह प्रथा अनुचित है ।
३. गणपति पूजन १० दिन करना संभव नहीं हो, तो डेढ दिन, पांच अथवा सात दिन गणपतिपूजन कर तत्पश्चात मूर्ति का विसर्जन कर सकते हैं ।
(साभार : २१वें शतक के कालसुसंगत आचारधर्म, प्रकाशक- श्री. अनंत (मोहन) धुंडीराज दाते )
श्री गणेशमूर्ति का विसर्जन नकली कुंड में क्यों न करें ?
‘प्रदूषणमुक्त श्री गणेशमूर्ति विसर्जन’ इस नाम पर कुछ नगरपालिकाओं द्वारा स्थान-स्थान पर पानी के कुंडों का निर्माणकार्य किया जाता है । साथ ही हिन्दुओं द्वारा भावपूर्ण पूजन की गई श्री गणेशमूर्तियों का इस कुंड में दान करें, इस प्रकार का धर्मविसंगत आवाहन भी किया जाता है ।

इस प्रकार के कुंड में श्री गणेशमूर्ति का विसर्जन करना अनुचित है । इसके धर्मशास्त्रीय कारणं आगे प्रस्तुत किए हैं ।
१. शास्त्र के अनुसार ‘प्राणप्रतिष्ठा की गई मूर्ति का बहते पानी में विसर्जन करें ।’ पूजा के कारण मूर्ति में आया चैतन्य बहते पानी में मूर्ति का विसर्जन करने से पानी द्वारा दूर-दूर तक पहुंचता है । कुंड का पानी बहता हुआ न होने के कारण इन आध्यात्मिक लाभों से श्रद्धालु वंचित रहते हैं ।
२. कुंड में श्री गणेशमूर्ति का विसर्जन करने के पश्चात नगरपालिका के कर्मचारी श्री गणेशमूर्ति पानी में घुलने से पूर्व ही कुंड से बाहर निकालकर रखते हैं । यह करना शास्त्रविरोधी है ।
३. कुंड में विसर्जित की गई मूर्ति पालिका के कर्मचारी कूडे की गाडी से ले जाते हैं, साथ ही पालिका के कर्मचारी मूर्ति को कूडे के समान फेंकते हैं । अनेक बार यह बात भी स्पष्ट हुई है कि, अधिकतर ये मूर्तियां खदानों के गंदे पानी में फेंकी जाती हैं ।
४. श्री गणेशमूर्ति का विसर्जन होने के पश्चात कुंड बंद किया जाता है । पालिका के कर्मचारी गणेशतत्त्व से भारित पानी गंदे नाले में छोडते हैं । यह भी श्री गणेश का अनादर ही है ।
अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
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अधिक मास में सनातन संस्था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्यों को देकर सर्वश्रेष्ठ ज्ञानदान का फल प्राप्त करें !
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