गाय के गोबर से बने मिथेन पर ट्रैक्टर चलेगा !
गाय का महत्त्व अब विदेश में भी सिद्ध होने लगा है । यह ध्यान में लेते हुए भारत सरकार गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाकर गोधन संवर्धन के लिए कदम उठाएगी क्या ?
गाय का महत्त्व अब विदेश में भी सिद्ध होने लगा है । यह ध्यान में लेते हुए भारत सरकार गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाकर गोधन संवर्धन के लिए कदम उठाएगी क्या ?
किसान एवं खेती के लिए पूरक व्यवसाय वृद्धिंगत होने के लिए मौलिक योगदान देनेवाले डब्ल्यू.आइ.टी. के (‘वालचंद इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के) प्राचार्य डॉ. विजय आठवलेजी को ‘राष्ट्रीय कृषिभूषण’ नामक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुआ है ।
भूमि में फॉस्फरस, यशद (जिंक), पोटैश, तांबे समान अनेक खनिज घटक होते हैं; परंतु ये घटक स्वयं ही वनस्पति को अन्न के रूप में उपलब्ध नहीं होते । केंचुए, इसके साथ ही भूमि के सूक्ष्म जीवाणु उन घटकों से अन्न निर्माण करते हैं और वनस्पतियों की जडों को देते हैं ।
श्रीलंका ने भारत से अन्न आयात करने के लिए कर्ज की मांग की है । वह जैविक खेती के विषय में मार्गदर्शन भी मांगे, तो इसमें भारतीय किसान बंधु भी आनंद से सहभागी होंगे ।
‘पद्मश्री’ पुरस्कार प्राप्त सुभाष पाळेकर ने ‘सुभाष पाळेकर प्राकृतिक कृषि तंत्र’ की खोज की । आज भारत सरकार ने इसका अनुमोदन कर इस तंत्र का प्रसार करने का निश्चय किया है । इस कृषि तंत्र में ‘जीवामृत’ नामक पदार्थ का उपयोग किया जाता है ।
सूखी घास, विघटनशील कचरा, पत्तों का कचरा, नारियल की शिखाएं, रसोईघर का गीला कचरा, इन सभी का विघटन कर हम पेडों के लिए आवश्यक ‘उपजाऊ मिट्टी’ बना सकते हैं । ऐसे प्राकृतिक पदार्थाें का विघटन होकर जो ‘मिट्टी’ बनती है, उसे अंग्रेजी में ‘ह्यूमस’ कहते हैं ।
जिस प्रकार कीडे प्राणियों को कष्ट पहुंचाते हैं अथवा काटते हैं, उस प्रकार वनस्पतियों को भी कीडों से कष्ट होता है । सब्जियों के रोपण के लिए हवा और सूर्यप्रकाश प्रकृति से उपलब्ध होते हैं, तो मिट्टी, उर्वरक, कीटनाशक, फफूंदनाशक इत्यादि का प्रबंध हमें करना पडता है ।