पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया इस संगठनपर बंदी लगाएं !
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की केंद्र सरकार से मांग
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की केंद्र सरकार से मांग
गोवंश की तस्करी करने वाले कल तक गोरक्षक और पुलिस पर आक्रमण करते थे, अब वे सैनिकों पर भी आक्रमण करने का साहस कर रहे हैं । यह देखते हुए ऐसों को फांसी की ही सजा देने का कानून बनाना आवश्यक है !
सरकारी मदरसे धार्मिक शिक्षा नही दे सकते, ऐसा निर्णय गोहाटी उच्च न्यायालय ने दिया। राज्य के मदरसों को सामान्य पाठशालाओं मे परावर्तीत करने के राज्य सरकार के निर्णय के विरोध मे उच्च न्यायालय मे प्रविष्ट की गर्इ याचिका पर यह निर्णय दिया गया।
गोहत्या और गोतस्करी के संबंध में केंद्र सरकार ने कठोर कानून बनाया, तो देश के राज्यों को अलग-अलग कानून बनाने की आवश्यकता नहीं होगी ! केंद्र सरकार को ऐसा कानून शीघ्रातिशीघ्र बनाना चाहिए, ऐसा ही हिन्दुओं को लगता है !
वर्तमान काल में इस प्रकार का विश्वास रखने वाले सरमा को शुभकामनाएं; केवल असम में ही नहीं, तो संपूर्ण देश में पिछले ७४ वर्षों में ऐसी स्थिति निर्माण नहीं हो सकी, यह सभी पार्टियों के शासनकर्ताओं के लिए लज्जास्पद है, यह भी उतना ही सत्य है !
आसाम के सिलचर में २५ दिसंबर की रात क्रिसमस कार्यक्रम मनाते समय कुछ लोगों ने इसका विरोध किया । उन्होंने यह कार्यक्रम बंद करने की मांग की । इस मामले में कोई भी गुनाह प्रविष्ट नहीं किया गया है, ऐसा पुलिस ने बताया ।
गोहत्या और गोतस्करी के संबंध में केंद्र सरकार ने कठोर कानून बनाया, तो देश कें राज्यों को अलग अलग कानून बनाने की आवश्यकता नहीं होगी ! केंद्र सरकार ने ऐसा कानून जल्द से जल्द बनाना चाहिए, ऐसा ही हिन्दुओं को लगता है !
मुसलमानों को मदरसों में न जाकर डॉक्टर एवं अभियंता बनकर समाज की सहायता करनी चाहिए । मुसलमानों के हित के लिए ही मदरसे बंद किए हैं, ऐसा विधान असम के मुख्यमंत्री हिम्मत बिस्व सरमा ने एक समाचार वाहिनी के कार्यक्रम में किया ।
कट्टरपंथी इस तरह का झूठा इतिहास बताकर, सच्चे इतिहास को झुठलाने का प्रयास कर रहे हैं ! क्या इसे ’इतिहास जिहाद´कहना चाहिए ? – संपादक
आसाम के कछार जिले के कटीगोरा में महादेव टिला के शिवलिंग और त्रिशूल ईसाइयों ने उखाडे थे । साथ ही उन्होंने वहां के बरगद के विशाल पेड भी काट दिए थे । अब हिन्दू रक्षा दल, हिन्दू छात्र संघ आदि हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने यहां पुन: शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की है ।