कांचीपुरम् (तमिलनाडु) के श्री कल्याण वरद मंदिर के स्थलवृक्ष का श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीलजी के करकमलों से किया गया रोपण ।

स्थानीय भक्तों एवं पुजारियों के साथ स्थलवृक्ष को (पीपल के वृक्ष को) पानी देती हुईं श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीलजी ।

कांचीपुरम् (तमिलनाडु) :  यहां के ब्रह्मदेशम् गांव के श्री कल्याण वरद मंदिर में २६ जुलाई २०२६ को सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीलजी के करकमलों से स्थलवृक्ष का (पीपल के वृक्ष का) रोपण किया गया । इस अवसर पर श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) गाडगीलजी ने स्थलवृक्ष का पूजन कर आरती उतारी । उससे पूर्व मंदिर के पुजारियों ने श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) गाडगीलजी से इस पूजा का संकल्प करवा लिया । श्री कल्याण वरद मंदिर श्री विष्णुजी का मंदिर है तथा इस अवसर पर स्थानीय भक्त एवं महिलाओं ने श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीलजी की वंदनीय उपस्थिति में श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ किया । इसके पश्चात श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीलजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को स्थलवृक्ष के विषय में मार्गदर्शन किया । कल्याण वरद मंदिर का कुंभाभिषेक २३ अगस्त को है, उसका भी निमंत्रण श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीलजी को दिया गया । इस अवसर पर सनातन संस्था के श्री. विनायक शानभाग भी उपस्थित थे ।

स्थलवृक्ष श्रीविष्णु का प्रतीक है – श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीलजी

श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने कहा, ‘‘स्थलरूपी पीपल श्री विष्णु का प्रतीक है । इस वृक्ष में ब्रह्मांड में स्थित श्री विष्णु का चैतन्य विद्यमान है । गर्भगृह में स्थित श्री विष्णु की मूर्ति में विद्यमान चैतन्य को सर्वत्र फैलाने का कार्य स्थलवृक्ष करता है । इसके कारण अपनेआप ही मंदिर का परिसर भी देवता के चैतन्य से भारित होता है । स्थलवृक्ष को प्रार्थना करने से ‘निसर्गदेवो भव ।’के अनुसार गर्भगृह में स्थित मूर्ति में विद्यमान शक्ति का हमें लाभ मिलता है, इतना स्थलवृक्ष का महत्त्व है । ‘इस पीपल के वृक्ष में विद्यमान चैतन्य आप सभी को मिले’, यह श्री कल्याण वरद विष्णुजी के चरणों में प्रार्थना !’’