विपक्षियों के कोलाहल के कारण संसद में परीक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी !

विपक्षियों ने विद्यार्थियों पर ही पुलिस कार्यवाही पर चर्चा करने की मांग की थी l

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – संसद में २७ जुलाई को परीक्षा सुधार विधेयक पर होने वाली चर्चा विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा किए गए कोलाहल के कारण संभव नहीं हो सकी । विपक्षियों की यह मांग थी कि जंतर-मंतर पर, तथा बिहार के सीवान में कथित विद्यार्थियों पर हुए लाठी मार एवं गोलीबारी की घटना पर चर्चा की जाए । लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिडला ने विपक्षी सांसदों से कहा, ‘मैं सायं ५ बजे तक का समय देता हूं । सरकार एवं विपक्षी सांसद इस विषय पर चर्चा करके अपना पक्ष प्रस्तुत करें ।’ किन्तु इस विषय पर सहमति नहीं बन सकी । उससे पूर्व लोकसभा प्रथम दोपहर १२ बजे तक, तत्पश्चात् २ बजे तक स्थगित की गई । राज्यसभा की भी यही स्थिति थी । यहां भी सदन दो बार स्थगित किया गया । पश्चात् सायं ५:१५ बजे सदन दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया । इससे पूर्व प्रातः ११ बजे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा सुधार विधेयक प्रस्तुत किया ।

दूसरी ओर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से त्यागपत्र देने के पश्चात् प्रथम बार संसद पहुंचे । सत्ताधारी दल के सांसदों ने शॉल पहनाकर उनका सम्मान किया तथा उन्हें संसद भवन के भीतर तक ले गए ।

संपादकीय भूमिका

  • संसद की कार्यवाही का संचालन करने के लिए प्रत्येक मिनट में अनुमानतः पौने तीन लाख रुपए व्यय किए जाते हैं । ऐसे समय में इस प्रकार का कोलाहल मचाकर जनता के करोडों रुपए व्यर्थ करने वालों से वह राशि वसूल की जानी चाहिए तथा उनकी सदस्यता भी निरस्त की जानी चाहिए !
  • इससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षियों को विद्यार्थियों के विषय में तथा प्रश्नपत्र प्रकटन (लीक) के विषय में कोई रुचि नहीं है, अपितु वे केवल सरकार को संकट में डालने के लिए ही इस विषय का उपयोग कर रहे हैं !