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नई देहली – केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने देहली के भारत मंडपम् में दिसंबर २०२५ में आयोजित सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के कार्यक्रम के लिए आयोजक सनातन संस्था को ६३ लाख रुपए दी, ऐसी जानकारी सूचना के अधिकार के अंतर्गत हिन्दूद्वेषी समाचार जालस्थल ‘द क्विंट’को मिली । इसके लिए अब कांग्रेस एवं साम्यवादियों उदरशूल हुआ है । कांग्रेस की प्रवक्ता रागिनी नायक ने इसकी सत्यता की जांच किए बिना केंद्र सरकार एवं सनातन संस्था पर आधारहीन आरोप लगाए हैं । रागिनी नायक ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत एवं राज्यमंत्री संजय सेठ, साथ ही देहली के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा सहित अनेक केंद्रीय मंत्री इस कार्यक्रम में उपस्थित थे । इस कार्यक्रम में संविधान को किनारे करके ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना करने का आवाहन करने के भाषण दिए गए, साथ ही इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा करने तथा उनका बलपूर्वक धर्मांतरण करने के लिए उकसाने वाले भाषण दिए गए ।
₹63 Lakhs for ‘Sanatan Rashtra Shankhnaad Mahotsav’ – Why Is Congress So Unsettled?
Congress & Communists are agitated over the Central Govt grant to the Sanatan Rashtra Shankhnaad Mahotsav, by @SanatanSanstha branding BJP “anti-Constitutional” and alleging anti-minority… pic.twitter.com/wMHpSeUdjD
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 20, 2026
नायक द्वारा ‘सनातन’ पर विषवमन !
१. सनातन संस्था जैसे संगठन ‘सनातन’ शब्द का दुरुपयोग तथा अपमान करते आए हैं । वास्तविक सनातन धर्म अन्यों की सहायता के लिए है, पीडा देने के लिए नहीं, यह स्पष्ट करने हेतु नायक ने संत तुलसीदास रचित ‘रामचरितमानस’ के श्लोक का उल्लेख किया । (कांग्रेस एक ओर संत तुलसीदास की ‘रामचरितमानस’ का उपयोग हिन्दू संगठनों पर कीचड उछालने के लिए करती है, तो दूसरी ओर इसी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी, दिग्विजय सिंह द्वारा रामचरितमानस की आलोचना किए जाने पर मौन रहती है । कांग्रेस के इस सुविधाजनक दोहरे मापदंड को समझें ! – संपादक)
समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाले,
संविधान को ताक पर रख ‘हिन्दू राष्ट्र’ की मांग करने वाले
‘अल्पसंख्यकों’ को भारत की सीमा से बाहर फेंकने की धमकी देने वाले…
‘साम्प्रदायिक संगठन’ की Funding करना क्या ‘मोदी सरकार’ का नया प्रयोग है ???
आज दिल्ली में मेरी ‘प्रेस वार्ता’ 🙏 https://t.co/KyDl2q0EE0
— Dr. Ragini Nayak (@NayakRagini) February 18, 2026
२. भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की धर्मनिरपेक्ष संरचना, भ्रातृत्व एवं संविधान को नष्ट करने के उद्देश्य से ‘विषाक्त विचारधारा’ को बढा रहे हैं ।
३. प्रधानमंत्री मोदी घृणास्पद भाषणों (Hate speech) पर मौन रहते हैं । (यदि ‘प्रधानमंत्री मौन रहते हैं’ यह मिथ्या आरोप एक क्षण के लिए मान भी लिया जाए, तब भी यह देश लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलता है, किसी राजनीतिक दल के नेता पर नहीं ! रागिणी नायक एवं उनकी कांग्रेस को यदि घृणास्पद भाषणों की इतनी ही ‘चिंता’ है, तो वे ऐसे वक्तव्य देने वालों के विरुद्ध परिवाद (शिकायत) अंकित क्यों नहीं कराते ? – संपादक)
४. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा मुसलमान समुदाय के विषय में दिए गए कथित विवादास्पद वक्तव्यों का संदर्भ दिया गया । इस समय नायक ने कहा कि ऐसा शब्दिक प्रहार अल्पसंख्यकों पर नहीं, अपितु इस देश के संविधान पर किया जाता है, यह हमें स्मरण रखना चाहिए । इस अवसर पर नायक ने संविधान की प्रति हाथ में ली थी । (संविधान में अनेक बार संशोधन कर कांग्रेस ने संविधान की हत्या की । उसके रक्त रंजित हाथ पुनः संविधान की प्रति को स्पर्श करते हैं, क्या यही संविधान पर वास्तविक प्रहार नहीं है ? – संपादक)
५. एक पत्रकार के प्रश्न के उत्तर में नायक ने कहा कि घृणास्पद भाषण का उपयोग महंगाई, बेरोजगारी तथा अर्थव्यवस्था की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विषयों से ध्यान भटकाने के लिए किया जाता है ।
क्या है प्रकरण ?
आदित्य मेनन नामक किसी पत्रकार ने यह समाचार लिखा है तथा उन्होंने आगे कहा है कि, ‘२५ प्रतिशत भारतीय मुसलमानों को बाहर फेंक दो’, ‘भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाओ’, ‘सामूहिक धर्मांतरण’ तथा ‘मुसलमानों को सामूहिक निष्कासित कराओ’, ऐसी कुछ मांगें महोत्सव के माध्यम से की गई थीं । उसमें आगे बताया गया है कि इस कार्यक्रम को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय एवं दिल्ली के पर्यटन मंत्रालय का समर्थन प्राप्त था । ‘सुदर्शन टीवी’ के प्रधान संपादक श्री. सुरेश चव्हाणके, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता (श्री.) अश्विनी उपाध्याय, ‘हिन्दू फंड’ के श्री. राहुल दीवान के महोत्सव के संदर्भहीन वक्तव्यों को भी इस समाचार में आगे जोडा गया है । इससे यह कार्यक्रम पूर्णतः मुसलमान विरोधी सिद्ध करने का दयनीय तथा थोथा प्रयास ‘द क्विंट’ ने किया । |
सनातन धर्मरक्षण हेतु ‘विद्युत’ की गति के समान कार्यरत अधिवक्ता विष्णु जैन !![]() ‘सनातन प्रभात’ ने महोत्सव के एक वक्ता के रूप में अधिवक्ता विष्णु जैन से इस प्रकरण में प्रतिक्रिया भेजने का अनुरोध किया, तब उन्होंने वह त्वरित भेज दी । इस पर ‘आपने विद्युत की गति से प्रतिक्रिया भेजी, उस हेतु आभार’, ऐसा ‘सनातन प्रभात’ ने सूचित किया । उस पर जैन ने उत्तर दिया, ‘सनातन’ का कार्य विद्युत की गति से ही होना चाहिए ! |
हिंदुत्वनिष्ठों की प्रतिक्रियाएं !
सरकार की कोई भी संवैधानिक अथवा वैधानिक त्रुटि नहीं ! – अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन
इस प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन से ‘सनातन प्रभात’ ने संवाद किया । इस समय उन्होंने कहा कि सरकार ने सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव हेतु ६३ लाख रुपये की निधि दी, यह केवल एक आरोप है । इसका क्या प्रमाण है, यह एक पृथक चर्चा का विषय हो सकता है । मुख्य रूप से यदि यह आरोप स्वीकार भी कर लिया जाए, तब भी सरकार द्वारा इस प्रकार निधि देने में कोई संवैधानिक अथवा वैधानिक त्रुटि नहीं है । राष्ट्र की अस्मिता को अक्षुण्ण रखने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने हेतु सरकार सदैव निधि दे सकती है । इस पर संविधान के केवल अनुच्छेद २७ के प्रतिबंध हैं, जो यहां लागू नहीं होते । अतः यदि ‘क्विंट’ तथा ‘कांग्रेस’ का यह तर्क मान भी लिया जाए कि ‘सरकार ने ६३ लाख रुपये दिए हैं’, तो भी उसमें कोई संवैधानिक दोष नहीं है !
संपादकीय भूमिका
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