आतंकवादियों को ‘उग्रवादी’ सिद्ध करनेवाला मीडिया और उनका ‘फेक नैरेटिव’ !

१. ‘फेक नैरेटिव’ क्या है ?

जब व्यवस्थित रूप से एक विशिष्ट विचारधारा निर्मित की जाती है, तो उसे ‘फेक नैरेटिव’ (झूठा कथानक) कहा जाता है । किसी मूल विषय के चलचित्र (वीडियो) का एक छोटा-सा अंश विशिष्ट पद्धति से मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया जाता है । जिससे उसे देखनेवाले व्यक्ति के मन में द्वेष उत्पन्न होता है । ये बातें हमारे सम्मुख इस प्रकार रखी जाती हैं कि जिससे मन, मस्तिष्क तथा विचार उसी दिशा में (हिन्दू-द्वेषी) सोचने लगते हैं । इसी प्रकार कुछ समय पूर्व ‘हिन्दू आतंकवाद’ (भगवा आतंकवाद) नाम का एक ‘फेक नैरेटिव’ तैयार किया गया था ।

२. आतंकवादियों को ‘उग्रवादी’ सिद्ध करनेवाला फेक नैरेटिव

वास्तव में अमेरिका की ‘बेसिक नेटेड फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन’ की सूची में अनेक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के नाम हैं; परंतु उसमें हमें कहीं भी किसी हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन का नाम दिखाई नहीं देता । इसके साथ ही ‘विकिपीडिया’ वेबसाइट पर वैश्विक आतंकवादी संगठनों की सूची में भी कहीं हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन नहीं हैं, फिर भी हमारे देश में ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’, ऐसा झूठा नैरेटिव रचा जाता है ।

कश्मीर के एक समाचार में ‘नो मिलिटेंट किल्ड इन लास्ट सिक्सटीन मंथ्स’ (पिछले १६ महीनों में एक भी उग्रवादी को मारा नहीं गया), ऐसा प्रकाशित हुआ । उसमें ‘आतंकवादी’ न लिखकर ‘उग्रवादी’ लिखा गया है । उन्होंने आतंकवादी को ‘उग्रवादी’ क्यों लिखा होगा ? इस विषय पर हमने कभी गंभीरता से विचार ही नहीं किया । ‘द वायर’ में कहा गया है कि ‘आतंकवाद और उग्रवाद समान नहीं हैं’ । उनके मतानुसार आतंकवाद और उग्रवादी होना एक ही बात नहीं है । ‘कश्मीर में आतंकवादी नहीं अपितु उग्रवादी (चरमपंथी) हैं’, इस प्रकार का फेक नैरेटिव फैलाया जाता है ।

आतंकवादी और उग्रवादी के बीच का भेद

श्री. रमेश शिंदे

ये दोनों शब्द हिंसा व अराजकता से संबंधित हैं । आतंकवादी का अर्थ है, ऐसे व्यक्ति या गुट जो अपने वैचारिक, राजनीतिक या धार्मिक उद्देश्यों को साध्य करने हेतु नागरिकों के विरुद्ध हिंसा व आतंक का आश्रय लेते हैं और इसके लिए वे अंधाधुंध हिंसा, बमविस्फोट तथा निष्पाप लोगों की हत्या करते हैं । उग्रवादियों का ध्येय प्रायः किसी विशिष्ट क्षेत्र की स्वतंत्रता, सरकार या व्यवस्था में परिवर्तन लाना होता है । इसके लिए वे हिंसक पद्धति का प्रयोग करते हैं । मुख्य रूप से वे नागरिकों के स्थान पर सुरक्षाबल, शासकीय संस्थाओं या विशिष्ट लक्ष्यों के विरुद्ध हिंसा करते हैं ।  – श्री. रमेश शिंदे

३. धर्मनिरपेक्ष प्रसारमाध्यमों द्वारा कश्मीर के आतंकवादियों को ‘उग्रवादी’ (चरमपंथी) सिद्ध करने का प्रयास

‘द वायर’ में ‘मिलिटेंट इन जम्मू एंड कश्मीर एंड द माओइस्ट’ ऐसा लिखा गया है । माओवादी अथवा नक्सलवादी भी आतंक निर्माण करना, अपहरण करना, क्रूरतापूर्वक हत्या करना इत्यादि समस्त दुष्कृत्य करते हैं; परंतु उनका एक भिन्न वर्ग बनाया गया है । एक को स्वतंत्रता सेनानी, तो दूसरे व्यक्ति को आतंकवादी और उग्रवादी कहा जाता है । इसका अर्थ यह हुआ कि एक राज्य में जो क्रांतिकारी है, वह दूसरे के लिए आतंकवादी है । कश्मीर के आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी घोषित करने के लिए उन्हें ‘आतंकवादी’ न कहकर ‘उग्रवादी’ कहा जाता है । हमारे देश में इतना बडा फेक नैरेटिव चल रहा है और हमने इसे कभी समझने का प्रयास ही नहीं किया । कश्मीर में स्वतंत्रता सेनानी और ‘मुजाहिद’ (जिहादी) हैं, वहां उन्हें आतंकवादी नहीं कहा जाता, अपितु ‘मुजाहिद’ अथवा स्वतंत्रता सेनानी कहा जाता है ।

उसमें आगे ‘पीपल फाइटिंग द इंडियन स्टेट एज अ मिलिटेंट’ ऐसा कहा गया है । यहां जो भारत सरकार से लडते हैं, उन्हें ‘उग्रवादी’ कहा गया है । कश्मीर से हिन्दुओं को भगा देना, हिन्दू महिलाओं से बलात्कार करना, उनकी क्रूरतापूर्वक हत्या करना, क्या यह सब भारत सरकार से लडना है ? हिन्दुओं का नरसंहार करके भी वे अपने को उग्रवादी अथवा स्वतंत्रता सेनानी समझ रहे हैं और देश के प्रसारमाध्यम उन्हें उग्रवादी कह रहे हैं । इससे यह फेक नैरेटिव किस प्रकार रचा जा रहा है, यह हमें समझना होगा ।

‘बीबीसी’ प्रसारमाध्यम ‘हमास’ के आतंकवादियों को ‘उग्रवादी’ कहता है, उन्हें ‘आतंकवादी’ नहीं कहता । उनके मतानुसार भी कश्मीर में लडनेवाले उग्रवादी ही हैं । इस्राइल में हमास के जो आतंकवादी लड रहे हैं, वे भी आतंकवादी न होकर उग्रवादी हैं । इससे यह ध्यान में आता है कि किस प्रकार एक समान फेक नैरेटिव रचे जाते हैं । आलोचना होने के उपरांत भी ‘बीबीसी’ हमास के आतंकवादियों को ‘आतंकवादी’ न कहकर उग्रवादी ही कहेगा । इसका अर्थ यह दिखाई देता है कि इस माध्यम द्वारा एक प्रकार से फेक नैरेटिव रचने का कार्य किया जा रहा है । आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र की सहायता करनेवाले आधिकारिक लोग भी हमास को ‘आतंकवादी संगठन’ नहीं कहते । हमास ने निर्दोष इस्राइली लोगों के हाथ-पैर बांधकर उन्हें जीवित जला दिया, तो भी क्या हमास को ‘आतंकवादी संगठन’ न मानकर ‘मानवतावादी संगठन’ समझा जाए ?

४. आतंकवाद के विरुद्ध इजरायल का ‘जैसे को तैसा’ उत्तर

एक समाचार के अनुसार इजरायल ने दावा किया कि हमास धार्मिक आतंकवाद करनेवाला संगठन है । इस विषय में प्रसारमाध्यमों पर बहुत बडा फेक नैरेटिव चल रहा था । उस समय इजरायल ने हमास से संबंधित चलचित्र (वीडियो) प्रसारित कर लोगों के सम्मुख सत्य उजागर किया । ‘हमास के आतंकवादियों ने छोटे बालकों को ‘ओवन’ में डालकर मार डाला’, ऐसा समाचार इजरायल के प्रसिद्ध ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ नामक समाचार-पत्र में आया था । उस पर एक नेता ने कहा, ‘उन छोटे बालकों को बेकिंग पाउडर डाले बिना ओवन में भून डाला ।’ उस पर वे निर्लज्जतापूर्वक लिखते हैं, ‘बेकिंग पाउडर लगाकर भूना था अथवा बेकिंग पाउडर लगाए बिना भूना था ?’, अर्थात मानवता की कोई सीमा ही नहीं छोडी । ये लोग मानवताशून्य फेक नैरेटिव रच रहे हैं । तत्पश्चात ‘इजरायल रक्षा दल’ के ‘एयर स्ट्राइक’ में वह नेता मारा गया । इजरायल ने ‘जैसे को तैसा’ उत्तर दिया, वैसा विचार हम भारतीय कब करेंगे?

अरब देश छोटे से इजरायल को भी नहीं छोडते । उसके लिए वे युद्ध कर रहे हैं और आतंकवाद फैला रहे हैं । भारत में प्रतिदिन कितनी भूमि वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकार में ली जा रही है ?, साथ ही कश्मीर में कितनी भूमि पर आतंकवादियों ने अधिकार कर लिया है । धर्मांध थोडी-सी भी भूमि छोडने के लिए तैयार नहीं होते । वक्फ बोर्ड हिन्दुओं की भूमि हडप रहा है अथवा हमारे कुछ हिन्दू अपनी भूमि उन्हें बेच रहे हैं; परंतु हिन्दुओं को इसका कुछ भी नहीं लगता है ।

– श्री. रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति.


अ. ‘हिन्दू-विरोधी मीडिया को भारतीय उद्योगपतियों से सहायता

संपूर्ण विश्व में एक ‘सिंडिकेट मीडिया प्रोजेक्ट’ चलाया जा रहा है । उसे अंतरराष्ट्रीय उद्योगपति जॉर्ज सोरोस आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं । अब भारत में भी इस प्रकार का ‘सिंडिकेट प्रोजेक्ट’ कार्यरत है । उसका ‘मूलधन कोष (कॉर्पस फंड)’ १०० करोड रुपयों का है । उसे ‘विप्रो’ प्रतिष्ठान के अजीम प्रेमजी से लेकर टाटा और नंदन नीलकेणी ने आर्थिक सहायता दी है ।

आ. हिन्दू राष्ट्र की दृष्टि से संविधान में परिवर्तन करने के लिए संगठित होना आवश्यक !

अनेक धर्मांध नेताओं ने कई बार अपने भाषणों में कहा है कि ‘जब उनकी सत्ता आएगी, तब वे इस संविधान को नहीं मानेंगे और वे इस संविधान को परिवर्तित कर देंगे’ । ‘भारतीय राजनीतिक प्रक्रिया में मुसलमान’ (मुस्लिम इन इंडियंस पॉलिटिकल प्रोसेस), इस ओमर खालिदी के लेख में कहा गया है, ‘भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं होने देंगे । भारत धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) राष्ट्र ही रहेगा’, ऐसा वचन कांग्रेस ने भारत के मुसलमानों को पहले ही दिया था । हम विचार करते हैं कि इंदिरा गांधी ने हमें वर्ष १९७६ में धर्मनिरपेक्ष बनाया; परंतु यह वचन तो वर्ष १९४७ से पूर्व का है ।

संविधान में परिवर्तन करने के विषय में हमारी सरकार ने असमर्थता व्यक्त की है । वास्तव में कांग्रेस ने इस संविधान में अनेक बार परिवर्तन किए हैं । इसलिए हम कोई असंवैधानिक कृत्य नहीं कर रहे हैं । ‘देश में जो सरकार सत्ता में आएगी, उसे संविधान में परिवर्तन करने का संपूर्ण अधिकार है’, ऐसा अनुच्छेद ३६८ में लिखा है । संविधान में १०६ परिवर्तन किए जा चुके हैं, तो १०७वां परिवर्तन भी हो सकता है और वह हिन्दू राष्ट्र का हो सकता है, यह बात हमें दृढता से रखने की आवश्यकता है । इस फेक नैरेटिव के दृष्टिकोण से सभी को एकत्र आकर एकजुटता से कार्य करना होगा । हमारे विषय में जो फेक नैरेटिव रचा गया है, हम उसका विरोध करने का प्रयास करेंगे ।

– श्री. रमेश शिंदे